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Save Water Essay in Hindi – जल संरक्षण पर निबंध

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Save Water Essay in Hindi – जल संरक्षण पर निबंध

Save Water Essay

Essay on Save Water in Hindi ( 200 words )

जल भगवान का दिया हुआ अमूल्य उपहार है और यह हमारी मूलभूत आवश्यकता है। इसकी जरूरत हमें विभिन्न क्रियकलापों के लिए होती है लेकिन मनुष्य इसे अंधाधुंध प्रयोग कर रहा है जिससे जल निरंतर कम होता जा रहा है। जल का सही तरीके से प्रयोग करना ही जल सरंक्षण है। वैसे तो हमारी पृथ्वी का दो तिहाई हिस्सा पानी है लेकिन सिर्फ 1 प्रतिशत जल ही स्वच्छ जल उपलब्ध है और यदि हम इसी तरह से जल को बर्बाद करके रहेंगे तो आने वाले समय में पानी नहीं मिलेगा जिसके अभाव में धरती पर जीवन खत्म हो जाऐगा।

जल सरंक्षण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है जिसे हम सबको समधना चाहिए और हमें जल का प्रयोग सुनियोजित तरीके से करना चाहिए। हम वर्षा के जल को भी सरंक्षित कर सकते हैं और उसका प्रयोग कपड़े आदि धोने में कर सकते हैं। हमें नलों को खुला नहीं छोड़ना चाहिए। जल को दुषित होने से भी रोकना होगा। कारखानों को नदियों से दुर लगाना चाहिए। हम सबको मिलकर जल सरंक्षण को अपनाना होगा ताकि आने वाले समय में भी हमें पानी मिल सके और पृथ्वी पर वनस्पति और सभी जीव अच्छे से जीवन यापन कर सकें।

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Save water Essay in Hindi 300 words

धरती पर समस्त जीवन चक्र को बनाए रखने के लिए हवा, पानी और भोजन जरूरी है, किसी एक की कमी के बिना कोई भी जीवित नहीं रह सकता । जल को अमूल्य संपत्ति कहा जाता है और इस की एक-एक बूंद हमारे लिए बहुत जरूरी है । धरती पर वैसे तो जल का 70% प्रतिशत भाग है लेकिन हम उपयोग कर सके उतना 1% प्रतिशत जल है । अत: में हमें जल को सोच समझ कर उपयोग करना चाहिए ।

हमें जल क्यों बचाना चाहिए

आपने यह स्लोगन तो सुना ही होगा कि “जल है तो कल है” यदि जल ही खत्म हो गया तो हमारा कल भी खत्म हो जाएगा। धरती पर अगर इंसानों को जिंदा रहना है, तो जल अवश्य बचाना होगा । पानी के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने बहुत सारे ग्रहों पर research किया, मगर सभी ग्रहों में से सिर्फ पृथ्वी में ही पानी है । भारत, अफ्रीका और एशिया के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्वच्छ पानी के लिए लंबी दूरी (लगभग 4 किमी। से 5कि.मी.) तय करनी पड़ रही है। दुनिया में कई ऐसे देश है जहां पर पानी की कमी है, Example=दुबई । दुबई एक ऐसा देश है, जहां पर पानी प्रति लीटर 100 रुपए में बिकता है । ऐसी ही स्थिति आने वाले कुछ ही समय में भारत की भी हो सकती है ।

जल को कैसे बचाना है-

1. पानी का दुरुपयोग कम करना पड़ेगा, जितने पानी की जरूरत है, उतना ही पानी यूज करना है । बर्तन धोते समय या फिर ब्रश करते समय पानी का जितना हो सके उतना कम उपयोग करना है ।

2. गाड़ी, हौंडा या फिर कोई भी दूसरे साधन को पाइप लाइन के द्वारा धोते समय पानी का उपयोग कम करना है । इसके लिए पाइप की जगह बाल्टी का यूज कर सकते हैं ।

3. जहां पर भी आपको नल खुला हुआ दिखे, तुरंत ही उस समय नल को बंद कर दीजिए । या फिर आपको कोई भी व्यक्ति पानी का दुरुपयोग करता दिखे, तो उसे पानी का महत्व समझाइए‌‌।

4. वॉशिंग मशीन में रोज-रोज कपड़े धोने से अच्छा है, तीन-चार दिन के बाद कपड़े इकट्ठे होने पर वॉशिंग मशीन में साफ करें ।

5. नहाते समय शॉवर की बजाय बाल्टी एवं मग का प्रयोग करें, क्योंकि इससे पानी की काफी बचत होगी ।

Jal Sanrakshan Par Nibandh ( 400 words )

जल प्रकृति द्वारा मानव को दिया गया एक अनमोल तोफहा है, जिसका मूल्य लगाना बहुत कठिन है| जल के बिना जीवन का कोई महत्त्व नहीं, न ही कोई अस्तित्व है, फिर चाहे वो जीवन पशुओ का हो या मनुष्यों का । किन्तु आधुनिक युग में आदमी की लापरवाही ने धरती पर जल की कमी जैसी समस्या को उत्पन्न कर दिया है, जिसके भयंकर परिणामस्वरूप आज कई इलाके सूखाग्रस्त है एवं पीने योग्य पानी के लिए तरस रहे है ।

पृथ्वी के तीन चौथाई भाग पर पानी है, किन्तु पीने योग्य पानी की मात्र बहुत कम है । मनुष्य अपनी नियमित गतिविधियों के चलते नहाने, धोने, भोजन बनाने आदि में इतना जल बर्बाद करता है, जिसका कोई हिसाब नहीं है ।

जल सरंक्षण का अर्थ ( Meaning of Jal Sanrakshan ):

जल सरंक्षण का साधारण अर्थ है, किसी भी भांति जल को बचाना । आप खुद ही सोचे कि धरा पर केवल ३% जल पीने लायक है, इससे ज्यादा चिंताजनक बात और क्या हो सकती है । विशेषज्ञों के अनुसार यदि जल सरंक्षण के उपाय नहीं किये गए एवं इसी प्रकार जल की बर्बादी चलती रही तो अगला विश्व युद्ध जो होगा वो जल के ऊपर एकाधिकार करने के लिए होगा, जिसमे मनुष्य का विनाश निश्चित है ।

जल सरंक्षण के उपाय:

पानी को बचाने के लिए सर्वप्रथम तो सभी लोगो के भीतर जागरूकता एवं जल की बढती कमी के प्रति चिंता का उत्पन्न होता अति आवश्यक है । मनुष्य ने अपनी भूलो के कारण प्रकृति को काफी नुकसान पहुचाया है, इसलिए यदि वह आने वाली पीढियों के अस्तित्व को बचाना चाहता है, तो उसे निम्न उपाय करने चहिये:-

• रोजमर्रा के कार्य जैसे कपडे धोना, बर्तन धोंना, खाना बनाना आदि में कम से कम जल की खपत करे । • शौच के लिए बरसात के पानी या खारे पानी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है । • पौधों को पानी देने के लिए पाइप के अलावा फुहारे वाली बाल्टी का इस्तेमाल करे । • पानी की रिसाव एवं टपकने की समस्या का भी शीघ्र समाधान हो एवं बरसात के पानी को इकठा करने के उपाय किये जाये ।

जल सरंक्षण हम सबका कर्तव्य है, ये केवल सरकार या एक संस्था का दायित्व नहीं । क्योकि:-

“ये जल है, अमृत है, ये जल ही जीवन है, इसकी बूंदों का मूल्य चुकाना कठिन है” ।

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Essay on Global Warming in Hindi

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जल संरक्षण पर निबंध 100, 150, 250, 500 शब्दों में | Water Conservation Essay in Hindi (with PDF)

पानी हर जीवित प्राणी के लिए बहुत जरूरी है। जल के बिना जीवन संभव नहीं है और ऐसे में अगर पानी की कमी हो जाए तो धरती में जीवन का संकट पैदा हो सकता है। आज भी बहुत से स्थानों पर लोग पानी की कमी की वजह कई समस्याओं का सामना रहे हैं। इसलिए हम सबकी यह जिम्मेदारी बन जाती है कि हम पानी के महत्व को समझें और उसके संरक्षण में जितना हो सके योगदान दें। यही वजह है कि अकसर विद्यार्थियों को भी जल संरक्षण के ऊपर निबंध लिखने के लिए आता है। 

इसलिए आज के इस आर्टिकल में हम जल संरक्षण पर निबंध 100, 150, 250, 500 शब्दों में लेकर आएं हैं। अगर आप जल संरक्षण पर निबंध अलग-अलग शब्दों में ढूंढ रहे हैं तो हमारे इस पोस्ट को पूरा पढ़ें। आप जल संरक्षण पर निबंध pdf फॉर्मेट में भी डाउनलोड कर सकते हैं जिसकी लिंक निचे दी गयी है।

जल संरक्षण पर निबंध

जल संरक्षण पर निबंध 100 शब्दों में 

पृथ्वी पर सभी लोगों का जीवन और अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जल का संरक्षण किया जाना बहुत आवश्यक है। अगर पानी को संरक्षित ना किया जाए तो सभी जीवित प्राणियों के लिए फिर जीवन संभव नहीं होगा। चाहे कोई भी हो हर किसी को पानी की आवश्यकता जीवन भर रहती है। हमारे देश भारत में ही ऐसे बहुत सारे राज्य हैं जहां पर पानी की कमी है जैसे कि राजस्थान। वहां पर आज भी पानी की किल्लत बहुत ज्यादा है और लोगों को पीने का पानी लाने के लिए बहुत ज्यादा लंबी लंबी दूरियां तय करनी पड़ जाती हैं। ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि हम जितना हो सके पानी का कम से कम इस्तेमाल करें और उसे दूषित भी ना करें। 

जल संरक्षण पर निबंध 150 शब्दों में

जल ही जीवन है क्योंकि इसके बिना कोई भी प्राणी जिंदा नहीं रह सकता। परंतु आज दुनिया भर के लोग पानी की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है पानी में घातक रसायनों का मिल जाना।‌ इसके अलावा कूड़ा कचरा अपशिष्ट पदार्थ भी पानी को दूषित करने में काफी बड़ी भूमिका निभाते हैं। जब लोग ऐसे दूषित पानी का उपयोग करते हैं तो उसकी वजह से उन्हें कई प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं जैसे कि हैजा, टाइफाइड इत्यादि। 

यदि लगातार बढ़ रहे जल प्रदूषण को अगर रोकने का प्रयास ना किया गया तो इसकी वजह से दुनिया भर में पानी की कमी बहुत ज्यादा हो जाएगी। इसलिए जो आने वाली जनरेशन है उसके लिए पानी के स्रोत बिल्कुल भी नहीं रहेंगे जिसके कारण पृथ्वी पर उनका जीवन काफी ज्यादा कठिनाई भरा हो जाएगा। इसलिए हमें चाहिए कि पानी का इस्तेमाल सोच समझ कर करें और उसे प्रदूषित होने से भी बचाएं। 

जल संरक्षण पर निबंध 250 शब्दों में

जल प्रत्येक जीवित प्राणी के जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग माना जाता है। जितने भी लोग इस पृथ्वी पर रह रहे हैं चाहे वो मनुष्य हो, जानवर हो, पशु पक्षी हो उन सबको जिंदा रहने के लिए पानी की जरूरत होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए और उसका सही तरह से संचालन करने के लिए स्वच्छ जल अत्यंत आवश्यक होता है। ‌

जल प्रदूषण के कारण

पानी को दूषित करने वाले एक नहीं बहुत सारे कारण हैं जोकि निम्नलिखित हैं –

  • औद्योगिक कूड़ा जैसे कि शीशा, पारा, क्षार, अम्ल हाइड्रोकार्बन इत्यादि। 
  • जल प्रदूषण के पीछे कूड़ा करकट भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारण है जैसे कि प्लास्टिक से बना हुआ सामान, खाद्य पदार्थों के पैकेट इत्यादि।
  • रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक का इस्तेमाल भी अब पहले से ज्यादा बढ़ गया है जिसके कारण जल प्रदूषण होता है।
  • पानी में जब तेल मिल जाता है तो उसकी वजह से जो जल में रहने वाले प्राणी है उनको बहुत नुकसान होता है। जैसे कि ‌जब समुद्र में परिवहन चलते हैं तो उनमें से तेल रिसता है जो पानी को खराब और दूषित कर देता है। 

जल संरक्षण के तरीके 

जल संरक्षण करने के लिए बहुत से तरीके अपनाए जा सकते हैं जैसे कि –

  • नहाते समय शावर का नहीं बल्कि बाल्टी का इस्तेमाल करें इससे का पानी कम बहता है।
  • कभी भी अपने घर की पानी की टंकी को भूले से भी खुला ना छोड़िए।
  • अगर आप की पानी की टंकी में लीकेज हो जाए तो उसे तुरंत ठीक करवाएं।
  • किसी भी काम को करने के लिए जितना हो सके बाल्टी का इस्तेमाल करें और कोशिश करनी चाहिए कि एक बालटी से ही काम हो जाए।
  • ब्रश करते समय या मुंह धोते समय पानी के नल को बंद करके रखें।

जल संरक्षण पर निबंध 500 शब्दों में

आज जिस प्रकार से पानी दूषित हो रहा है वह एक बहुत ही ज्यादा चिंता का विषय है क्योंकि जल हर इंसान को जीवित रहने के लिए आवश्यक होता है। यदि इस तरफ ध्यान ना दिया गया तो धीरे-धीरे पानी के सभी स्रोत खत्म हो जाएंगे जिसके कारण लोगों को स्वच्छ पानी पीने के लिए उपलब्ध नहीं हो सकेगा। इसलिए सभी मनुष्य को चाहिए कि वह जल संरक्षण के उपायों की तरफ ध्यान दें जिससे कि पानी को सुरक्षित किया जा सके। 

जल संरक्षण क्या है 

जल संरक्षण एक ऐसा तरीका है जिसके माध्यम से जल को संरक्षित करते हैं ताकि आने वाले समय के लिए पानी उपलब्ध हो सके। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि पानी का उपयोग एक सीमित मात्रा के अंदर ही करना चाहिए। यदि पानी का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा किया जाएगा तो उसकी वजह से पानी की बहुत ज्यादा कमी हो जाएगी। हमारा देश भारत भी एक ऐसा देश है जहां पर जल की कमी की समस्या बहुत तेजी के साथ बढ़ रही है। जिसके कारण लोगों को स्वच्छ जल पीने के लिए नहीं मिल पा रहा है। यह जरूरी है कि जल को स्टोर करके रखा जाए ताकि भविष्य में उसका इस्तेमाल किया जा सके। 

जल संरक्षण की आवश्यकता 

जल संरक्षण की आवश्यकता इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर इसी तेजी के साथ पानी नष्ट किया जाता रहा तो एक दिन पूरी पृथ्वी पर पानी की बहुत ज्यादा किल्लत हो जाएगी। जब पृथ्वी पर पीने लायक पानी नहीं रहेगा तो ऐसे में सभी प्राणियों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में अगर जल संरक्षण किया जाए तो उससे पीने लायक पानी आने वाले समय के लिए सुरक्षित करके रखा जा सकता है।

जल संरक्षण के तरीके

हम सभी की यह जिम्मेदारी है कि हम जल प्रदूषण को रोकने प्रयास करें और जल का संरक्षण करें। यह एक बहुत बड़ी विपदा है जिसकी वजह से पृथ्वी का पानी धीरे-धीरे दूषित हो रहा है। लेकिन कुछ उपाय अपनाकर जल को संरक्षित किया जा सकता है जैसे कि –

  • जितनी आवश्यकता हो उतने ही जल का प्रयोग करना चाहिए। बहुत से लोगों की यह आदत होती है कि वह जरूरत से ज्यादा पानी को बहाते हैं जिससे कि पानी की बर्बादी होती है। 
  • जिन लोगों को पानी के महत्व के बारे में जानकारी नहीं है उनमें जागरूकता फैलानी चाहिए ताकि वो जल संरक्षण में अपनी भूमिका अदा कर सकें। 
  • वर्षा के कारण जो पानी पृथ्वी पर आता है उसका संग्रह करना चाहिए क्योंकि वर्षा का जो जल होता है वह शुद्ध होता है। बरसात के पानी को जमा करने के लिए अपने इलाके में तालाब बनवाने चाहिएं।
  • वृक्षों की जो बहुत ज्यादा कटाई हो रही है उसे रोकना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से भूमि प्रदूषण बढ़ता है जिसके कारण जो भूगर्भ में जल स्थित है उसमें प्रदूषण फैलता है। 
  • जब स्नान करें या फिर बर्तन साफ करने वाला काम करें तो उस समय कभी भी नल को बहता हुआ नहीं छोड़ें क्योंकि ऐसे पानी बहुत बर्बाद होता है।
  • ऐसे नल जो किसी सार्वजनिक स्थान पर लगे हुए हैं वहां पर अगर पाइप में से पानी लीक होने की समस्या है तो उसे तुरंत ठीक करवाना चाहिए। 

जल संरक्षण पर निबंध PDF

आप इस निबंध की PDF file भी डाउनलोड कर सकते हैं जिसके लिए निचे दिए गये लिंक का उपयोग करें:

Download PDF

  • जल प्रदूषण पर निबंध
  • जल प्रदूषण रोकने के उपाय
  • पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध
  • वायु प्रदूषण पर निबंध
  • वृक्षारोपण पर निबंध
  • जनसंख्या वृद्धि पर निबंध

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हमने आपको जल संरक्षण पर निबंध के बारे में बताया। हमने अपने इस लेख में जानकारी दी कि आप किस प्रकार से अलग-अलग शब्दों में जल संरक्षण के ऊपर निबंध लिख सकते हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि हमारा यह लेख अवश्य अच्छा लगा होगा। यदि पोस्ट अच्छा लगा हो तो इसे उन लोगों के साथ भी जरूर शेयर करें जो जल संरक्षण पर निबंध 100,150,250, 500 शब्दों में (Water Conservation Essay in Hindi) के बारे में जानकारी ढूंढ रहे हैं। 

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Home » Essay Hindi » Essay On Save Water In Hindi जल संरक्षण पर निबंध

Essay On Save Water In Hindi जल संरक्षण पर निबंध

इस निबंध Essay On Save Water In Hindi में जल संरक्षण का महत्व पर निबंध (Jal Sanrakshan Par Nibandh) लेखन का प्रयास है। जल जीवन रूपी अमृत है जो धरती पर जीवों के लिए अनिवार्य है। ईश्वर ने हमें जीवन के लिए जल दिया लेकिन हम इसकी कद्र नही करते है। जब जल सकंट आता है, तब हमें इसका मूल्य समझ आता है। जल संरक्षण की आवश्यकता क्यों है? इस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास है। इस पोस्ट “Importance Of Water Conservation Essay In Hindi” में जल संरक्षण का महत्व और उपाय पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

जल संरक्षण पर निबंध Essay On Save Water In Hindi

जल ही जीवन है का मूलमंत्र हमें जीवन में उतारने की आवश्यकता है। जल के बिना जीवन की कल्पना करना भी बेमानी है। जल संरक्षण क्या है? यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हमें जल संरक्षण का अर्थ जानना जरूरी है। जल संरक्षण का अर्थ है – जल को संरक्षित रखना अर्थात जल को बचाना। जितने पानी की आवश्यकता है, केवल उतना ही पानी खर्च करना जल संरक्षण कहलाता है। जल संरक्षण में जल को प्रदूषित होने से रोकना भी है। सुनियोजित तरीके से जल प्रबंधन करना जल संरक्षण कहलाता है।

दुनिया में 71 फीसदी जल है लेकिन इस जल का 97 फीसदी पीने योग्य नही है। करीब 2 फीसदी जल ग्लेशियरों के रूप में है। बाकी रहा 1 फीसदी जल ही पीने योग्य है। धरती पर जल का एक बहुत बड़ा भाग महासागरों के रूप में है। यह महासागरीय जल स्वाद में खारा है जो पीया नही जा सकता है।

उपयोगी मीठे जल की सीमित मात्रा नदियों , तालाबों, कुंवो और झीलों के रूप में मौजूद है। मीठे पानी के इन सोर्सस में कमी के कारण जल संकट आता है। इन स्रोतों में जल की कमी का मुख्य कारण वर्षा का नही होना है। इसलिए वर्तमान समय में जल को संरक्षित करने की आवश्यकता है। जल संरक्षण पर निबंध ( Essay On Save Water In Hindi ) में इसका महत्व महत्वपूर्ण है। पीने योग्य साफ पानी हर मनुष्य का अधिकार है। इस पानी का बेवजह अत्यधिक दोहन होता है।

जल संरक्षण का महत्व पर निबंध Jal Sanrakshan Par Nibandh –

वर्तमान में कई देश जल संकट से गुजर रहे है। इन देशों में पीने योग्य पानी की भयंकर कमी है। ये धरती के वो इलाके है जहां बारिश बहुत कम होती है। अफ्रीका के कई देश भयंकर जल संकट से गुजर रहे है। ऑस्ट्रेलिया में भी बारिश की कमी से जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो रखी है। भारत देश भी जल संकट से अछूता नही है, यहां भी कई राज्य सूखे से प्रभावित है। दुनिया में ज्यादातर जल संकट रेगिस्तानी इलाकों में होता है लेकिन ग्लोबल वार्मिंग और घटते जंगलों के कारण अन्य इलाके भी सूखे की चपेट में आये है।

भारत देश के कई इलाकों में इतनी जबरदस्त जल समस्या है कि लोगों को दूर दराज इलाकों में पानी लाने जाना पड़ता है। कई मिलों पैदल चलकर एक घड़ा पानी लाने के लिए काफी मशक्कत होती है। नहाने या कपड़े धोने के लिए तो छोड़िए पीने के लिए पानी नही मिलता है। लोग जल की कमी के कारण गंदगी वाला पानी पीने को मजबूर है। पानी की कमी से कृषि नही होती जिससे रोजी रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

एक दुनिया यह है जो अभी आपने पढ़ी है जो जल के लिए संघर्ष कर रही है। एक दूसरी दुनिया भी है जहां पानी की कोई कमी नही है। ये लोग पानी की बर्बादी करते है क्योंकि इन्हें पानी का महत्व नही पता है। जितनी हमें पानी की जरूरत होती है, उससे भी कई गुना पानी बर्बाद होता है। हमें स्वच्छ जल संरक्षण की आवश्यकता है।

जल संरक्षण की आवश्यकता क्यों है Importance Of Water Conservation Essay In Hindi –

जल मनुष्य जीवन में एक महत्वपूर्ण कारक है। कई प्रकार के कार्यो के लिए जल की आवश्यकता होती है। कुछ महत्वपूर्ण कार्यो के बारे में यहां पर बताने का प्रयास है –

1. जीवित रहने के लिए शरीर को नित्य पानी पीने की जरूरत होती है। इसलिए पीने योग्य पानी के लिए जल संरक्षण की आवश्यकता है।

2. कृषि के लिए जल संरक्षण की आवश्यकता है। विभिन्न प्रकार की फसलों के उत्पादन के लिए जल सिंचाई की जरूरत होती है। सिंचाई के लिए जल तालाबों, नहरों और नदियों से मिलता है।

3. दैनिक जरूरतों जैसे नहाना, कपड़े धोना इत्यादि के लिए भी जल आवश्यक है। बिना जल के यह सम्भव नही है। गंदगी को दूर करने के लिए जल एकमात्र उपाय है।

4. भोजन बनाने के लिए भी जल की आवश्यकता होती है। सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ को पकाने के लिए पानी चाहिए। स्वच्छ जल की आवश्यकता भोजन में जरूरी है।

5. केवल मनुष्य ही नही दूसरे जीव जंतुओं को भी पानी की आवश्यकता होती है। जल के बिना इनकी जिंदगी भी नामुमकिन है। धरती पर पाये जाने वाले समस्त जीवों के लिए जल अमृत समान है।

6. पेड़ पौधों के विकास और पनपने के लिए भी जल अति आवश्यक है। बिना जल के वृक्षों का जीवन नामुमकिन है। पेड़ पौधे हमें ऑक्सीजन, फल, जड़ी बूटी, औषधि, सब्जियां इत्यादि देते है।

7. उधोगों में भी पानी की आवश्यकता होती है। कच्चे माल से प्रोडक्ट बनाने के लिए लाखों गैलन पानी चाहिए। बिना पानी के औधोगिक उत्पादन सम्भव नही है। यहां तक कि भवन निर्माण में शुरू से लेकर अंत तक पानी की आवश्यकता होती है। कागज उधोग में भी लुगदी बनाने के लिए जल महत्वपूर्ण है।

जल की कमी के कारण Save Water Essay In Hindi –

पानी की कमी के कई कारण है जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण कारकों पर प्रकाश डालना जरूरी है। एक बात गौर करने लायक है कि जल समस्या आपके या हमारे गांव की ही नही है, यह एक वैश्विक समस्या है। जल समस्या से निजाद पाने के लिए जल की कमी के कारण जानना जरूरी है।

  • जल की कमी का सबसे महत्वपूर्ण कारक बारिश का ना होना है। रेगिस्तानी इलाकों में तो वैसे भी बारिश बहुत कम होती है। इसलिए यहां पर जल संकट हमेशा रहता है। वर्तमान समय में कई और इलाकों में भी बारिश नही है जिससे वहां भी जल संकट गहरा जाता है। बारिश होने से ही तालाब, झीलें जल से भर जाती है। भूमिगत जल का स्तर भी बारिश के कारण ही बढ़ता है। बारिश ना होने से भूमिगत जल स्तर बहुत नीचे चला जाता है। इससे खासकर गांवों में हैंडपंप सूखे पड़े है। कुँए भी भी पानी नही होने से सुख गए है।

जल की कमी के कारण –

  • स्वच्छ जल की कमी का दूसरा मुख्य कारण जल प्रदूषण है। जल प्रदूषण के कारण पानी दुषित हो जाता है जिससे वह पीने योग्य नही रहता है। जल संरक्षण की सफलता के लिए आवश्यक है कि हम जल को प्रदूषित होने से बचाये। जल प्रदूषण के कई कारण है, इसकी अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट पढ़े –  जल प्रदूषण पर निबंध
  • वृक्षों की अंधाधुंध कटाई के चलते भी जल समस्या में बढ़ौतरी हुई है। हम यह जानते ही है कि पेड़ बारिश के लिए जिम्मेदार होते है। आजकल इंसान लालच में आकर जंगलों को काट रहा है। इस कारण जंगल कई किलोमीटर सिकुड़ गए है। वृक्षों का महत्व पर अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट पढ़े –  वृक्षों का महत्व पर निबंध
  • जनसंख्या व्रद्धि भी पीने योग्य जल की कमी का एक बड़ा कारण है। प्रति व्यक्ति जल की खपत भी बढ़ी है। भुजल स्तर में लगातार गिरावट भी जल की कमी की समस्या उत्पन्न करता है। जल की कमी होने के पीछे जागरूकता का अभाव होना भी है।

जल संरक्षण के उपाय Water Conservation Essay In Hindi –

जल संरक्षण पर निबंध Essay On Save Water In Hindi – जल की कमी के कारण होने वाली भयंकर आपदा को रोकने के लिए जल संरक्षण आवश्यक है। जल संरक्षण के कुछ उपाय अपनाने से काफी हद तक जल की कमी को दूर किया जा सकता है।

1. स्वच्छ जल संरक्षण के लिए पर्यावरण प्रदूषण को रोकना होगा। जल प्रदूषण वर्तमान की गम्भीर समस्या है जो जल को प्रदूषित करती है। स्वच्छ पीने योग्य जल को संरक्षित करने के लिए जल प्रदूषण को रोकना होगा।

2. जल संरक्षण में दूसरा मुख्य उपाय है बारिश के जल को स्टोर करना। जिन इलाकों में बारिश कम होती है, वहां पर वर्षा जल को पोंड या होद बनाकर भविष्य के लिए स्टोर किया जा सकता है। ग्राम पंचायत स्तर पर भी योजना बनाकर उचित क्रियान्वयन के द्वारा जल संरक्षण किया जा सकता है। वर्षा के जल को छत से पाइप के जरिये उतारकर उसे होद में संरक्षित करना भी एक महत्वपूर्ण उपाय है।

3. हमें पानी का दुरुपयोग रोकना होगा। हमारे कुछ छोटे प्रयास जल संरक्षण में उपयोगी साबित हो सकते है। बिना उपयोग के पानी को खर्च मत करो। नल को बेवजह खुला छोड़ना भी जल की कमी को पैदा करता है। जहां जितने पानी की आवश्यकता है, उतना ही जल लेना चाहिए। हमें सुनियोजित जल प्रबंधन करना चाहिए जिससे जल संरक्षण सफल होगा।

4. शॉवर से नहाने के बजाए बाल्टी में पानी भरकर नहाना चाहिए। इससे भी पानी की बहुत बचत हो सकती है। कार, बाइक इत्यादि वाहनों को पानी के पाइप से नही धोना चाहिए क्योंकि इससे पानी की बर्बादी होती है। बाल्टी से ही इन वाहनों को धोना बढ़िया विकल्प है।

Jal Sanrakshan Par Nibandh जल संरक्षण पर निबंध –

5. रोजमर्रा के कामों में जल की कम से कम खपत हो, यह सुनिश्चित करे। कपड़े धोना या बर्तन धोना हो, पानी की बर्बादी ना करे। शौच के लिए भी पानी कम इस्तेमाल करे। भोजन पकाने में भी जितना हो सके, उतना कम पानी उपयोग करे। अगर पानी के पाइप से किसी भी तरह से जल रिसाव हो रहा है तो उसे तुंरत ठीक करे।

6. कृषि कार्यों में सिंचाई के लिए बून्द बून्द वाली सिंचाई करना उपयोगी है। बून्द बून्द सिंचाई से पानी की कम बर्बादी होती है। जितने पानी की आवश्यकता आपकी फसल को है, उतना ही पानी सिंचाई में इस्तेमाल करे।

7. जल संरक्षण को सफल बनाने का सबसे कारगर उपाय सामाजिक जागरूकता है। समाज में जल की उपयोगिता को समझाने के लिए शिक्षा की आवश्यकता है। बच्चों को स्कूल में जल संरक्षण के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। इसी कड़ी में जल संरक्षण पर निबंध (Essay On Save Water In Hindi) लेखन महत्वपूर्ण है।

Essay On Save Water In Hindi – आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए जल संरक्षण की आवश्यकता है। अगर जल संरक्षण के उपाय नही किये गए तो भविष्य में जल के लिए विश्वयुद्ध हो सकता है। जल की कमी एक गंभीर समस्या है जिससे निजात पाने के लिए हमें गम्भीर रूप से विचार करना होगा।

यह भी पढ़े – 

  • जल ही जीवन है पर निबंध
  • पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

Note – इस पोस्ट Essay On Save Water In Hindi में जल संरक्षण पर निबंध (Jal Sanrakshan Par Nibandh), जल संरक्षण का महत्व, जल की कमी के कारण, जल संरक्षण की आवश्यकता और जल संरक्षण के उपाय आपको कैसे लगे। यह आर्टिकल “Importance Of Water Conservation Essay In Hindi” पसंद आया हो तो शेयर भी करे।

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ESSAY KI DUNIYA

HINDI ESSAYS & TOPICS

( Jal Sanrakshan ) Water Conservation Essay in Hindi – जल संरक्षण पर निबंध

November 17, 2017 by essaykiduniya

यहां आपको सभी कक्षाओं के छात्रों के लिए हिंदी भाषा में जल संरक्षण पर निबंध मिलेगा। Here you will get Paragraph and Short ( Jal Sanrakshan ) Water Conservation Essay in Hindi Language/Essay on jal sanrakshan in hindi for students of all Classes in 200 and 400 words.

( Jal Sanrakshan ) Water Conservation Essay in Hindi – जल संरक्षण पर निबंध

( Jal Sanrakshan ) Water Conservation Essay in Hindi

( Jal Sanrakshan ) Water Conservation Essay in Hindi – जल संरक्षण पर निबंध (200 words)

जल हमारे जीवन के लिए बहुत ही जरूरी है। हमारे पृथ्वी की तीन चौथाई हिस्सा पानी से घिरा हुआ है लेकिन फिर भी लोग पानी की कमी से झुझ रहे हैं। हम हर रोज पानी का इस्तमाल नहाने, कपड़े धोने , खाने पीने आदि में करते हैं। धरती पर पीने के पानी का अभाव है इसलिए भविष्य में भी जल की पूर्ति के लिए जल का सरंक्षण ही जल को बचा सकता है। कुछ लोगों को तो पानी के लिए दुर दुर तक जाना पड़ता है जिससे उन्हें काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। जल सरंक्षण पुराने समय में किया जाता था।

लोग बारिश के पानी को छतों पर एकत्रित करते थे जिसे बाद में प्रयोग में लाया जाता था। हमें भी पानी को बर्बाद नहीं करना चाहिए। जितने पानी की जरूरत हो उतना ही प्रयोग करना चाहिए। पानी को दुषित भी नहीं करना चाहिए क्योंकि दुषित पानी भी किसी काम नहीं आता है। आज के समय में जल सरंक्षण बहुत जरूरी है अन्यथा तीसरा विश्व युद्ध पानी को लेकर ही होगा। इसके लिए कोई भी एक व्यक्ति कार्य नबीं कर सकता है। जल को सरंक्षित वैश्विक स्तर पर किया जाना चाहिए और सबको मिलकर इसके लिए प्रयास करना चाहिए।

( Jal Sanrakshan ) Water Conservation Essay in Hindi – जल संरक्षण पर निबंध (400 words)

‘जल’ मानव जाति के लिए अनोखी अनमोल उपहारों में से एक है। सभी जीवित चीजें ज्यादातर पानी की तरह होती हैं| मानव शरीर दो तिहाई पानी का है यह स्पष्ट, रंगहीन तरल है जो 20 फीट की मोटाई के माध्यम से देखे जाने पर नीले रंग का दिखता है। जैसा कि हम जानते हैं, पानी हमारे जीवन में लाता है और जीवन को कायम करता है। जल ऐसा कुछ है जिसे हम इसके बिना कुछ नहीं कर सकते। सब के बाद, हमारे शरीर सत्तर प्रतिशत पानी से बना है। एक महीने से अधिक समय तक भोजन के बिना जीवित रहना संभव है, लेकिन बिना पानी के हम दिनों के मामले में नष्ट हो जाएंगे।

हम आशा करते हैं कि आप इस निबंध ( ( Jal Sanrakshan ) Water Conservation Essay in Hindi – जल संरक्षण पर निबंध ) को पसंद करेंगे।

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short essay on jal sanrakshan in hindi

Hindi Essay and Paragraph Writing – Water Conservation (जल संरक्षण ) for classes 1 to 12

जल संरक्षण  पर निबंध – इस लेख में हम जल संरक्षण की आवश्यकता क्यों है, जल संरक्षण के क्या लाभ हैं, जल को बचाने के लिए हमें क्या करना चाहिए के बारे में जानेंगे। पृथ्वी का 70% भाग पानी से ढका हुआ है लेकिन इसका अधिकांश भाग समुद्र में मौजूद है, जो खारा है। इससे हमें ताजे पानी के लिए महासागरों के अलावा अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।  जल की प्रत्येक बूँद हमारे लिए कीमती है। इसे बचाने का प्रयास किया जाना चाहिए। अक्सर स्टूडेंट्स से असाइनमेंट के तौर या परीक्षाओं में जल संरक्षण पर निबंध पूछ लिया जाता है। इस पोस्ट में जल संरक्षण  पर कक्षा 1 से 12 के स्टूडेंट्स के लिए 100, 150, 200, 250 से 350 शब्दों में अनुच्छेद दिए गए हैं।

  • जल संरक्षण पर 10 लाइन  10 lines
  • जल संरक्षण पर अनुच्छेद 1, 2, 3 के छात्रों के लिए 100 शब्दों में
  • जल संरक्षण पर अनुच्छेद 4 और 5 के छात्रों के लिए 150 शब्दों में
  • जल संरक्षण पर अनुच्छेद 6, 7 और 8 के छात्रों के लिए 200 शब्दों में
  • जल संरक्षण पर अनुच्छेद 9, 10, 11, 12 के छात्रों के लिए 250 से 300 शब्दों में

जल संरक्षण पर 10 लाइन 10 lines on Water Conservation in Hindi

  • जल संरक्षण का अर्थ है – जल के प्रयोग को घटाना एवं सफाई, निर्माण एवं कृषि आदि के लिए अवशिष्ट जल का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) करना।
  • हमारी पृथ्वी का 71% भाग जल से घिरा हुआ है जिसमें से केवल 1.6% जल ही मानव के प्रयोग करने लायक है। 
  • पृथ्वी के के सभी जीवित प्राणियों के लिए पानी बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे बचाना और संरक्षित करना अनिवार्य है। 
  • सूखा, कॉन्टेमिनेशन तथा प्रदूषण के कारण हर साल पीने योग्य पानी की कमी होती जा रही है।
  • भारत में कई ऐसे क्षेत्र है जहाँ पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है।
  • अगर आज हमने जल का संरक्षण नहीं किया तो आने वाली भावी पीढ़ियां स्वच्छ पानी के लिए तरस जायेंगी।
  • बरसात के पानी को जमा करके उसका उपयोग करने से स्वच्छ जल बचाने में मदद मिल सकती है।
  • प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में कुछ परिवर्तन करके जल संरक्षण कर सकते है, जैसे अनावश्यक पानी का इस्तेमाल कम करके।
  • इसके अलावा, टूटे-फूटे नलों से बहते अनावश्यक पानी की बर्बादी को रोक कर पीने योग्य पानी बचाया जा सकता है।
  • पानी को दूषित होने से बचाने के लिए कारखानों से निकलने वाले हानिकारक तत्वों को नदियों में मिलने से रोक कर किया जा सकता है।

Short Essay on Water Conservation in Hindi जल संरक्षण  पर अनुच्छेद 100, 150, 200, 250 से 350 शब्दों में

जल संरक्षण पर निबंध – जल जीवन का आधार है। जल न हो तो हमारे जीवन का आधार ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए हमारे धरती पर जल की सीमित उपलब्धता को देखते हुए जल का संरक्षण करना अनिवार्य हो जाता है।

जल संरक्षण पर निबंध/ अनुच्छेद कक्षा 1, 2, 3 के छात्रों के लिए 100 शब्दों में

पृथ्वी पर सभी जीवित प्राणियों के लिए जल बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए जल को बचाना और उसका संरक्षण करना बहुत जरूरी है। जैसे जैसे जनसंख्या बढ़ रही है वैसे वैसे पानी की माँग भी बढ़ रही है। पीने के लिए, नहाने के लिए,  खाना बनाने के लिए, साफ-सफाई के लिए तथा अन्य कामों के लिए पानी मनुष्य की सबसे प्राथमिक और प्रमुख आवश्यकता बन गई है। इसलिए, जल संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाना जरूरी है। जैसे अनावश्यक पानी की बर्बादी को रोक कर तथा वर्षा जल को जमा करके और उसके उपयोग के माध्यम से।

जल संरक्षण पर निबंध/ अनुच्छेद कक्षा 4, 5 के छात्रों के लिए 150 शब्दों में

पृथ्वी पर सभी जीवित प्राणियों के अस्तित्व के लिए पानी बेहद जरूरी है, इसलिए पानी को बचाना और इसे संरक्षित करना अनिवार्य है। बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ पानी की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही है। पीने, नहाने, खाना पकाने, सफाई और अन्य विभिन्न उद्देश्यों के लिए पानी की आवश्यकता मनुष्य के लिए सर्वोपरि आवश्यकता बन गई है। नतीजतन, जल संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाना जरूरी है। हम घर पर पानी की खपत के बारे में जागरूक होकर पानी की कमी को रोक सकते हैं और इस मूल्यवान संसाधन का संरक्षण कर सकते हैं। इसमें कम देर तक नहाना, ब्रश या शेव करते समय नल बंद रखना और अनावश्यक पानी का उपयोग कम करना शामिल है। इसके अलावा, वर्षा जल को इकट्ठा करना और इस जल को पौधों को पानी देने या स्वच्छता जैसी गतिविधियों के लिए में शामिल करके जल संरक्षण प्रयासों में और योगदान दे सकते है। 

जल संरक्षण पर निबंध/ अनुच्छेद कक्षा 6, 7, 8 के छात्रों के लिए 200 शब्दों में

जल है तो कल है। यह कथन अतिशयोक्ति नहीं है, क्योंकि पानी के बिना पृथ्वी पर किसी का भी जीवित रहना असंभव है। पानी व्यक्ति के जीवन के सभी पहलुओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि इसके बिना कई गतिविधियाँ पूरी नहीं की जा सकतीं। यह सब बाते जानते हुए भी व्यक्ति इसे बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ता है। हमारी पृथ्वी का 71% भाग जल से घिरा हुआ है जिसमें से केवल 1.6% जल ही मानव के प्रयोग करने लायक है। और यह भी जल धीरे-धीरे घटता जा रहा है या दूषित होता जा रहा है। भारत के कई राज्यों में स्वच्छ जल की कमी है। लोगों को कई मील दूर जाकर अपने लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता है। कई स्थानों पर प्रकृति के इस अमूल्य उपहार को खरीद कर प्रयोग किया जाता है। यह सब देखते हुए प्रकृति की इस धरोहर को बचाने और धरती पर जीवन कायम रखने के लिए कई देश जल संरक्षण पर काम भी कर रहे हैं। जीवन जीने के लिए जल और वह भी स्वच्छ जल बहुत ही आवश्यक है। इसलिए हमें जल का दुरुपयोग करने से बचना चाहिये। हमें जितनी आवश्यकता हो उतना ही पानी लेना चाहिए और पानी की एक-एक बूँद को बचाकर जल संरक्षण में अपना योगदान देना चाहिए। 

जल संरक्षण पर निबंध/ अनुच्छेद कक्षा 9, 10, 11, 12 के छात्रों के लिए 300 शब्दों में

पृथ्वी पर सभी जीव के जीवन के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जल का संरक्षण करना बहुत जरूरी है, क्योंकि बिना जल के जीवन जीना संभव नहीं है। पूरे ब्रह्मांड में एक अपवाद के रूप में पृथ्वी पर जीवन चक्र को जारी रखने में पानी बहुत मदद करता है क्योंकि यह मनुष्यों द्वारा अपनी दैनिक दिनचर्या में उपयोग किया जाने वाला बहुमूल्य संसाधन है। इसलिए, प्रत्येक व्यक्ति को जल संरक्षण को प्राथमिकता देना और भावी पीढ़ियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की गारंटी देना अनिवार्य है। हमारी पृथ्वी का तीन-चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है। फिर भी इतना जल होते हुए भी उनमें से केवल कुछ ही प्रतिशत प्रयोग करने लायक होता है। इस तीन-चौथाई जल का 97 प्रतिशत जल खारा होता है जो मनुष्यों द्वारा प्रयोग करने लायक नहीं है। सिर्फ 3 प्रतिशत जल उपयोग में लाने लायक है। इस 3 प्रतिशत में से 2 प्रतिशत जल तो धरती पर बर्फ और ग्लेशियर के रूप में है और बाकी का बचा हुआ एक प्रतिशत जल ही पीने लायक है। यह भी जल धीरे-धीरे कम होता जा रहा है या प्रदूषित होता जा रहा है। हमें यह भी मालूम है कि देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं जो सूखे से ग्रस्त हैं अर्थात जहाँ बारिश कम होती है या होती ही नहीं अथवा जहाँ नदियों का अभाव है और ऐसे स्थानों पर लोग पानी के लिए तरसते हैं। लोगों को कई मील दूर जाकर अपने लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता है तथा कई स्थानों पर लोग इसकी कमी के कारण या दूषित जल के प्रयोग के कारण ही मर जाते हैं। जल के बिना तो पेड़ पौधे, पशु-पक्षी सभी प्रभावित होते है। इसलिए, इन सब बातों को ध्यान में रखकर प्रत्येक व्यक्ति को पानी की कीमत को समझना चाहिए और इसे बचाने का हर संभव कोशिश करना चाहिए और साथ में जल का संरक्षण करने के लिए लोगों के बीच जागरूकता भी फैलाना चाहिए ताकि लोग पानी की एक-एक बूँद को बचाना सीख जाए।

Jal sanrakshan par Nibandh Hindi Essay 

 जल संरक्षण (water conservation)  par nibandh hindi mein.

जल संरक्षण पर निबंध   – जल मनुष्य की सबसे प्राथमिक और प्रमुख आवश्यकताओं में से एक है। हमारी पृथ्वी का 71% भाग जल से घिरा हुआ है जिसमें से केवल 1.6% जल ही मानव के प्रयोग करने लायक है। 

जल एक अनवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन है, अर्थात इसको पुनः किसी भी तरह से बनाया नहीं जा सकता अब आपको यह पता ही चल गया होगा की हमारे पास केवल 1.6% ही जल है और दिन प्रतिदिन साल दर साल यह मात्रा कम ही हो रही है। 

मानव जल का बेहद ही लापरवाह तरीके से प्रयोग करता है वह यह तो जानता है कि पृथ्वी पर पीने योग्य पानी बेहद ही सीमित मात्रा में है लेकिन इसके बावजूद प्रयोग करने से ज्यादा इस पानी को बिना वजह बहा देता है और तो और बरसात के पानी को भी ऐसे ही बहने देता है। 

क्या आपको पता है कि अगर हम बरसात के पानी और प्रयोग करने वाले पानी का संरक्षण करें तो हम जल की इस सीमित मात्रा में वृद्धि कर सकते हैं तथा अपने आगे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित कर सकते हैं। 

इस जल संरक्षण के निबंध में हम आज की सबसे जटिल समस्याओं में से एक जल संरक्षण के विषय पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों को साँझा करेंगे। 

जल संरक्षण एक ऐसा विषय है जिस पर आपको किसी भी कक्षा में निबंध लिखने के लिए कहा जा सकता है। अतः आशा करते हैं कि हमारे द्वारा दी गई जानकारियाँ आपके लिए सहायक सिद्ध होगी। 

  • जल संरक्षण की परिभाषा

जल संरक्षण की आवश्यकता

जल संरक्षण की विधियां, जल संरक्षण नहीं करने के परिणाम.

  • जल संरक्षण हेतु भारत सरकार की प्रमुख योजनाएं  

वर्तमान में भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में जल संरक्षण एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है, इस बात की गवाही निम्नलिखित आंकड़े देते हैं; 

  • दुनिया भर में लगभग 900 मिलियन से 1.1 बिलियन लोगों के पास सुरक्षित पेयजल नहीं है, और 2.4 बिलियन लोगों के पास बुनियादी स्वच्छता तक पहुंच भी नहीं है।  
  • तेजी से बढ़ती जनसंख्या की तुलना में पानी की खपत तेजी से बढ़ रही है।  
  • पिछले 70 वर्षों में जहां दुनिया की आबादी तीन गुना हो गई है, वहीं पानी की खपत छह गुना बढ़ गई है।  
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 तक दुनिया के 8 अरब लोगों में से 5 अरब लोग पानी की कमी वाले क्षेत्रों में रहेंगे। 
  • सुरक्षित पेयजल तक पहुंच न होना सभी वैश्विक मौतों में से 80% के लिए जिम्मेदार था।  
  • हेपेटाइटिस ए, पेचिश और गंभीर दस्त सहित जलजनित संक्रमणों से हर साल लगभग 5 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है।

इनमें से कई लोग अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त पानी पाने के लिए संघर्ष करेंगे।

जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी है, कृषि में प्रगति हुई है, आधुनिकीकरण विकसित हुआ है और आजीविका में सुधार हुआ है, इसके फलस्वरूप पानी की खपत भी बढ़ रही है।  

इसके अलावा अकाल, दुरुपयोग और प्रदूषण ने आपूर्ति कम कर दी है। झीलों, नदियों और आर्द्रभूमियों से अक्सर पानी निकाला जाता है, जिससे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय क्षति होती है।  

2003 की संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, “दुनिया भर में, मेगासिटीज और कृषि की मांग के कारण भूजल की निकासी हो रही है, जबकि उर्वरक अपवाह और प्रदूषण पानी की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहे हैं।”

इन आंकड़ों को देखने के बाद अब चलिए जल संरक्षण की परिभाषा, आवश्यकता, प्रमुख विधियां और वर्तमान में भारत सरकार द्वारा इस दिशा में चलाई जा रही प्रमुख योजना के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

जल संरक्षण की परिभाषा (Definition of water conservation)

जल की क्षति को बचाने की प्रक्रियाओं को जल संरक्षण कहते हैं। 

दूसरे शब्दों में – “जल संरक्षण का अर्थ है पानी का प्रभावी ढंग से उपयोग करना, पानी की बर्बादी को कम करने के लिए पानी के उपयोग को बनाए रखना, निगरानी करना और प्रबंधित करना। जल संरक्षण में ताजे पानी के प्राकृतिक संसाधनों को स्थायी रूप से प्रबंधित करने, जलमंडल की सुरक्षा करने और वर्तमान और संभावित मानव मांग को पूरा करने से जुड़ी सभी नीतियां, रणनीतियां और पहल शामिल हैं।”

एक वयस्क मनुष्य में पानी की मात्रा 60% होती है।  जैसा कि पृथ्वी पर शेष सभी जीवन के लिए है, पानी हमारे अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। जल पृथ्वी पर जीवन के लिए वनस्पति, जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। 

भोजन उत्पादन से लेकर स्वच्छता और अवकाश तक, मनुष्य विभिन्न उद्देश्यों के लिए पानी पर निर्भर हैं। 

दुनिया की प्रत्येक प्रजाति पानी पर बहुत अधिक निर्भर करती है, और जब यह संसाधन प्रभावित या कम हो जाता है, तो मानव और पशु जीवन दोनों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

कुछ लोग इस बात से अनभिज्ञ हैं कि ताज़ा पानी कितना कीमती और सीमित है और इसके संरक्षण से कितनी मदद मिल सकती है।  

यदि हम संरक्षण प्रयासों को अपनाते हैं तो हमारे शहर में उपयोग के लिए पर्याप्त पानी होगा।

जल संरक्षण की आवश्यकता को हम निम्न बिंदुओं द्वारा समझ सकते हैं:

  • सूखा और पानी की कमी कम हो गई है, बढ़ते खर्च और नागरिक अशांति कम हो गई है, हमारा पर्यावरण सुरक्षित है, और मनोरंजक गतिविधियों के लिए पानी उपलब्ध है।
  • जल संरक्षण से ऊर्जा की बचत होती है। जल निस्पंदन, हीटिंग और पंपिंग के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए पानी की खपत कम करने से आपका कार्बन उत्सर्जन भी कम हो जाता है।
  • कम पानी का उपयोग करते हुए, हम अपने पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा कर सकते हैं और मछली, बगुले, ऊदबिलाव और अन्य प्रजातियों के लिए आर्द्रभूमि आवास बनाए रख सकते हैं।  शुष्क मौसम के दौरान यह अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण है।
  • जल संरक्षण से आप पैसे बचा सकते हैं। यदि आपके पास पानी का मीटर है, तो आप जितना कम पानी का उपयोग करेंगे, आपकी जल कंपनी आपसे उतना ही कम शुल्क लेगी।
  • जल संरक्षण न केवल घरेलू ऊर्जा बिल बचाता है बल्कि पड़ोसी तालाबों, नालों और जलमार्गों में जल प्रदूषण की संभावना भी कम करता है।
  • जल प्रबंधन जल प्रसंस्करण और वितरण के माध्यम से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को भी कम करता है जिससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा कम होता है। 
  • जब सार्वजनिक सीवेज प्रणालियाँ चरमरा जाती हैं तो अनुपचारित अपशिष्ट जल भी नदियों और जलाशयों में रिस सकता है।
  • जल संरक्षण मिट्टी की नमी को कम करके और रिसाव से संबंधित विषाक्तता को कम करके हमारे सीवर टैंक के जीवनकाल को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

जल संरक्षण के उद्देश्य (Aim of water conservation)

जल संरक्षण के निम्नलिखित उद्देश्य हैं; 

  • यह सुनिश्चित करके भावी पीढ़ियों के लिए पानी को संरक्षित करना कि किसी पारिस्थितिकी तंत्र से मीठे पानी का निष्कासन उसकी प्राकृतिक प्रतिस्थापन दर से अधिक न हो।
  • ऊर्जा संरक्षण और उपयोग, क्योंकि जल पंपिंग, प्रसार और अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग सभी के लिए महत्वपूर्ण मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। 
  • जल प्रबंधन में दुनिया भर के विभिन्न देशों में कुल बिजली उपयोग का 15% से अधिक शामिल है।
  • पर्यावास संरक्षण, जिसमें मानव जल के उपयोग को कम करना, न केवल स्थानीय प्रजातियों और प्रवासी जलपक्षियों के लिए मीठे पानी के आवासों के संरक्षण में सहायता करता है, बल्कि पानी की गुणवत्ता में भी सुधार करता है।

लोगों के लिए जल संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूकता फैलाना एक महत्वपूर्ण तरीका है। 

जल संरक्षण के कुछ तरीके इस प्रकार हैं:

1) घर पर जल संरक्षण की विधियां

घर पर ही आप निम्नलिखित तरीके से जल को संरक्षित कर सकते हैं। 

  • जब वॉशर में कपड़े बहुत सारे हों तो ही उनको धोएं।
  • पानी की बचत करने वाले शॉवरहेड्स, शॉवर टाइमर और कम से कम नल का इस्तेमाल करें।
  • कम या दोहरे फ्लश का उपयोग करें।
  • अपने टूथब्रश का उपयोग करते समय पानी बंद कर दें, अपने रेजर को सिंक में धो लें।
  • हाथ से बर्तन धोते समय बर्तन साफ करते समय पानी को बहने न दें।
  • जहां भी संभव हो, पानी का पुनर्चक्रण करें और  इसका उपयोग कम करें।
  • पेड़ों और पौधों पर गीली घास के एक टुकड़े का प्रयोग करें। 
  • स्प्रिंकलर सावधानी से लगाएं।
  • हाइड्रोलॉजिकल मीटर का प्रयोग करें.
  • कुशल जल प्रणाली का प्रयोग करें।
  • अपनी कार की सफाई करते समय पानी को बिना वजह न बहने दे। 
  • ड्राइववे और फुटपाथ धोने के लिए झाड़ू का उपयोग करें, न कि पानी की नली का।
  • वाष्पीकरण को कम करने के लिए स्विमिंग पूल को ढकें।
  • खरपतवारों को न बढने दे। 

2) खेत में जल संरक्षण

किसान लोग खेत में जल संरक्षण निम्नलिखित तरीके से कर सकते हैं। 

(i) वर्षा जल संचयन: किसान अतिरिक्त वर्षा को बाद में उपयोग के लिए बचा सकते हैं। भूजल को भारी गिरावट से बचाने के लिए, किसान पूरे उत्पादन के दौरान पानी की पर्याप्तता बनाए रखते हुए प्रभावी ढंग से भूजल स्तर की भरपाई कर सकते हैं।  

इस तकनीक का उपयोग देश के उन क्षेत्रों में भूजल संसाधनों की मदद के लिए किया जाता है जो सूखे के प्रति संवेदनशील हैं और जहां प्रचुर वर्षा होती है।

ii) जैविक खेती: कम उर्वरकों के उपयोग के विपरीत, जैविक खेती से उपज बढ़ती है। अधिक लोगों द्वारा जैविक कृषि पद्धतियों को अपनाने और कम पेट्रोकेमिकल उर्वरक का उपयोग करने के परिणामस्वरूप यूट्रोफिकेशन-संबंधी प्रक्रियाएं भी कम हो रही हैं। 

इसके अतिरिक्त, जलीय पर्यावरण की सुरक्षा से कृषि विस्तार की स्थिरता में सुधार होता है। 

(iii) कवर फसलें: कवर फसलें, जो जमीन की रक्षा के लिए बोई गई हैं जो अन्यथा उजागर हो जाती हैं, मिट्टी की गुणवत्ता और कार्बनिक यौगिकों को बढ़ाती हैं और कटाव और तनाव को कम करती हैं।  

यह पानी को बनाए रखने की मिट्टी की क्षमता को बढ़ाता है और मिट्टी में पानी के प्रवेश की प्रक्रिया को सरल बनाता है।

(iv) टपक सिंचाई विधि: सामान्य सिंचाई पद्धतियाँ टपक सिंचाई सुविधाओं की तुलना में अधिक अपव्यय का कारण बनती हैं जब वे सीधे पौधे के आधार पर पानी वितरित करती हैं।  

दिन के अधिक आरामदायक अंतराल (सुबह और शाम) के दौरान जब पानी का वाष्पीकरण कम होता है, तब सिंचाई करने से भी पानी की हानि को कम किया जा सकता है।

(v) खेत का समतलीकरण: ज्यादातर किसान जिन क्षेत्रों या बगीचों में आप खेती कर रहे हैं वे समतल नहीं होते हैं, कोई भी पानी जो मिट्टी में नहीं समाता वह जल्दी ही बह जाता है और अपशिष्ट जल के प्रमुख स्रोतों में से एक है। इसलिए फसल बोने से पहले जमीन को ठीक से समतल करने के लिए लेजर और अन्य उपकरणों का उपयोग करें, खेत का समतलीकरण करने से अतिप्रवाह की समस्या को कम करता है या शायद खत्म भी कर देता है, अपशिष्ट बर्बादी को कम करता है और संरक्षण को प्रोत्साहित करता है।

  • मीठे पानी की कमी क्षेत्रीय के अलावा एक वैश्विक मुद्दा भी है। विश्व के कुछ क्षेत्रों में वर्षा दर में गिरावट के लिए ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव जिम्मेदार हो सकते हैं।  
  • खतरनाक अपशिष्टों, रासायनिक रिसाव, अनुपचारित अपशिष्टों के निर्वहन, अपर्याप्त सिंचाई सुविधाओं, निपटान और रिसाव आदि जैसे कारणों से प्रदूषण के प्रकाश में, स्वस्थ मीठे पानी के संसाधन गंभीर रूप से सीमित हैं और हर साल कम हो रहे हैं।  
  • इन सबके परिणामस्वरूप ग्रहीय पर्यावरण नष्ट हो रहा है।  दुनिया भर में कई जगहों पर साल के लगभग हर दिन बारिश होती है। 
  • इसके बावजूद, विभिन्न कारकों, जैसे निपटान, संरक्षण, वाष्पीकरण, स्वच्छता आदि के कारण गंभीर चुनौतियाँ अभी भी हैं। 
  • विभिन्न प्रक्रियाओं से होने वाली भारी जल हानि में वर्षा की मात्रा एक स्वीकृत कारक है। 
  • अधिकांश व्यक्ति अभी भी पानी का उपयोग गैर-जिम्मेदाराना ढंग से करते हैं और जल संरक्षण की आवश्यकता से अनभिज्ञ हैं। यह एक भयानक सच्चाई है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।  
  • घरों और व्यवसायों को पानी उपलब्ध कराने के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण का खर्च तेजी से अस्थिर होता जा रहा है।  दुनिया में ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां अत्यधिक शुष्कता है और पानी की कमी वांछनीय से कम है। 
  • परिणामस्वरूप, क्षेत्र शुष्क भूभाग या टीले बन जाते हैं क्योंकि उथले भूजल तालिकाओं को पर्याप्त रूप से पुनः नहीं भरा जाता है। 
  • यदि बेहतर सिंचाई विधियों का उपयोग नहीं किया जाता है, तो संभावित वाष्पीकरण-उत्सर्जन, वास्तव में, प्रकृति द्वारा उत्पादित वर्षा से अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
  • इस प्रकार इसके कारण मिट्टी शुष्क हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप शुष्क भूभाग बन जाता है। यदि स्वच्छ जल के संरक्षण के लिए प्रभावी हस्तक्षेपों को कुशलतापूर्वक व्यवहार में लाया जाए तो ही पर्यावरण और इसके निवासी जीवित रहने में सक्षम होंगे।
  • जल पुनर्चक्रण खाद्य आपूर्ति का समर्थन करने के लिए आवश्यक जलमार्गों को संरक्षित करने में योगदान देगा।  उचित मात्रा में वर्षा न होने से फसलें विकसित नहीं हो पातीं। 
  • इस प्रकार, यदि भूजल कम हो जाता है, तो भोजन की लागत बढ़ जाएगी और कई और लोगों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ेगा। घर और कार्यस्थल पर जल संरक्षण खाद्य फसलों को बढ़ाने के महत्वपूर्ण कर्तव्य के लिए और अधिक मुक्त कर देगा। 
  • पानी की कमी के कारण वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है। मीठे पानी की कमी और ग्लोबल वार्मिंग के कारण, दुनिया के आधे से अधिक सबसे बड़े दलदल या तो सूख गए हैं या तबाह हो गए हैं। 
  • दलदलों में कई अलग-अलग प्रकार के जीवित जीव देखे जा सकते हैं। वे आम तौर पर समुद्री और पक्षी प्रजनक के रूप में काम करते हैं, इसलिए उनके विलुप्त होने से कई जानवरों और पोषक चक्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।
  • जब वाणिज्यिक, कृषि और घरेलू उद्देश्यों के लिए ताजा पानी प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण होता है, तो इससे एक सफल अर्थव्यवस्था को संचालित करना कठिन हो जाता है।  
  • मीठे पानी की आपूर्ति की कमी से उन वस्तुओं के निर्माण में बाधा आ सकती है जिनमें ऑटोमोबाइल, ब्रेड और कपड़ा सहित बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

जल संरक्षण हेतु भारत सरकार की प्रमुख योजनाएं

संविधान के अनुसार जल राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है इसीलिए प्रत्येक राज्य अपने अधिकार क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के नियम और योजनाएं लागू कर सकती हैं लेकिन केंद्र सरकार विभिन्न प्रकार की योजनाओं में राज्यों को वित्तीय सहायता प्रधान करती है इसके अलावा केंद्र सरकार भी कुछ योजनाएं शुरू की है जो प्रत्येक राज्य में लागू होता है। 

जल संरक्षण हेतु भारत सरकार निम्नलिखित योजनाएं चला रही है। 

जल जीवन मिशन

जल जीवन मिशन के अंतर्गत भारत सरकार प्रत्येक राज्य के साथ हिस्सेदारी करके 2024 तक भारत के प्रत्येक घर में नल और पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहती है। 

भारत सरकार ने इस योजना की शुरूआत 1 अक्टूबर 2021 को की थी, इसका उद्देश भारत के समस्त शहरों में जल की सार्वभौमिक उपस्थिति सुनिश्चित करना है। 

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

इस योजना की शुरुआत 2015 में हुई थी इसका उद्देश्य कृषि कार्य में जल का बुद्धिमत्ता पूर्वक उपयोग करना है। बाद में 2016 में इसके तहत बड़ी तथा माध्यम 90 सिंचाई परियोजनाओं को सम्मिलित किया गया। 

सही फसल अभियान

सही फसल अभियान की शुरुआत शुष्क क्षेत्रों में ऐसी फसलो के उपयोग हेतु हुई थी जिसमें बहुत ही कम जल का उपयोग होता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि ये फसलें आर्थिक रूप से लाभकारी तथा पर्यावरण के अनुकूल हो। 

अमृत सरोवर अभियान की शुरुआत 22 अप्रैल 2022 को आजादी के 75 में वर्ष पर आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में की गई थी इसका उद्देश्य देश के समस्त जलाशयों और जलकुंड का कायाकल्प करना है जिससे भविष्य के लिए जल का संरक्षण किया जा सके। 

कैच द रैन योजना

कैच द रैन योजना की शुरुआत 22 मार्च 2021 में हुई थी इसका उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण करना वनों का सघनीकरण, देश के सभी जिलों में जल शक्ति केंद्रों की स्थापना करना और वर्षा जल का संचयन करना है। 

अटल भूजल योजना

अटल भूजल योजना के तहत देश में चिन्हित सभी 7 क्षेत्र जहां जल की अत्यंत कमी थी और भूजल का प्रबंधन करना अति आवश्यक था, ऐसे सभी क्षेत्रों में भूजल का प्रबंध करने के लिए सामुदायिक सहयोग पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत जल स्रोतों का विकास और प्रबंधन किया जा रहा है। 

नमामि गंगे योजना

इस योजना उद्देश्य गंगा तथा उसकी सहायक नदियों को साफ तथा स्वच्छ रखना है। इससे जल का प्रदूषण कम होगा और जल की उपयोगिता बढ़ेगी। 

जल हमारी प्राकृतिक आवश्यकता है तथा जल का कोई अन्य विकल्प नहीं है और यह बेहद ही सीमित मात्रा में उपस्थित है इसलिए इसका जितना ज्यादा से ज्यादा और जल्दी से जल्दी संरक्षण किया जाएगा आगे आने वाली पीढ़ी उतनी ही ज्यादा सुखी और सुरक्षित रहेगी। 

ग्रामीण क्षेत्रों में जल का बिना वजह ही खेतों में दुरुपयोग किया जाता है जबकि शहरी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के उद्योगों घरेलू कामो में जल का बेहद ही ज्यादा मात्रा में दुरुपयोग किया जाता है। 

जल को संरक्षित करना बेहद ही आसान है आपको बस अतिरिक्त जल के बहाव को रोकना है, बुद्धिमत्ता पूर्वक जल का इस्तेमाल करना है, स्थिर जल को साफ रखना है तथा वर्षा के पानी का संचयन करना है।

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जल संरक्षण पर निबंध – Essay on water conservation in Hindi

जल संरक्षण पर निबंध (Water conservation essay in Hindi): जब हमें पानी के महत्व का पता चलेगा, तब हम पानी का संरक्षण कर सकते हैं. दिन ब दिन जल का उपयोग बढ़ रहा है. बहुत सारे जगह में जल का उपयोग जरूरत से ज्यादा किया जाता है. जिससे जल नष्ट होता है. और यह नष्ट होते हुए जल को संरक्षण में बदलना जरूरी है. जिससे आने वाली पीढ़ी को फायदा पहुंचेगा. तो चलिए जल संरक्षण पर निबंध (Essay on water conservation in Hindi) की ओर बढ़ते हैं.  

मानव प्रकृति से विभिन्न उत्पाद दान के रूप में लाभ किया है. हवा, मिट्टी, जंगल, जानवर, खनिज आदि मनुष्य को अपने दैनिक जीवन में मदद करते हैं. ये सब संपत्ति हैं. इसी तरह जल विभिन्न कार्यों में मदद करता है. इसके बिना जीवन को आगे बढ़ाना असंभव है. इसलिए जल का दूसरा नाम ‘ जीवन ‘ है. जल मनुष्य के लिए एक अनमोल धन है.

यह अमूल्य प्राकृतिक संसाधन बहुत काम में निवेशित होता है. सुबह बिस्तर से उठने से लेकर रात को बिस्तर पर जाने तक पानी की जरूरत होती है. भोजन बनाने, स्नान करने, कपड़े और बर्तन साफ करने में जल आवश्यक है. अच्छे पेयजल की कमी से स्वास्थ्य खराब हो सकता है. कृषि के लिए सिंचाई की जरूरत है. यह कारखानों और नावों के लिए आवश्यक है. बिजली पैदा करने के लिए जल जरूरी है. आवास, पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए भी पानी की आवश्यकता होती है. व्यापारी जहाजों और नौसेना के जहाजों के लिए पानी महत्वपूर्ण है.

jal sanrakshan par nibandh

हम पानी के बिना जीवित नहीं रह सकते. आवश्यकता या मजबूर होने पर एक व्यक्ति भोजन के बिना कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है; लेकिन वह पानी के बिना एक हफ्ते भी नहीं रह सकता.

सबसे पहले, पृथ्वी पर जीवन पानी द्वारा प्रेषित किया गया था. धीरे-धीरे विभिन्न पौधे और जानवर सृष्टि हुए. मानव ने पहले जल स्रोतों के पास अपना घर बनाया था. दुनिया के सबसे पुराने शहर सिंधु नदी, नील नदी, टाइग्रिस, यूफ्रेट्स और होयांग हो तट में थे.

जल का अवस्थिति

ये तो सब जानते है की, पृथ्वी की सतह का लगभग तीन-चौथाई भाग पानी से ढका है. यदि दुनिया का सारा पानी भारत के ऊपर रखा दिया जाता, तो जल स्तर की ऊंचाई 425 किलोमीटर होता. यह एवरेस्ट की ऊंचाई का लगभग 50 गुना है. यह सब पानी हमारे काम के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा पा रहा है. पुरे विश्व में जितना पानी है उनमें से सागरों और महासागरों में लगभग 97 प्रतिशत पानी होता है. कुछ पर्वत चोटियों और अंटार्कटिका जैसे ठंडे स्थानों में, लगभग 2 प्रतिशत पानी बर्फ के रूप में है. लगभग सौ प्रतिशत पानी नदियों और झीलों में, वायुमंडल में कणों के रूप में और भूमिगत जलाशयों में होता है.

भूजल संसाधनों को कुओं, नलकूपों और कुओं की मदद से लाया जाता है और विभिन्न गतिविधियों में निवेश किया जाता है. जब कम बारिश होती है, तो भूजल विशेष रूप से हमारे लिए सहायक होता है. जिन क्षेत्रों में नदियाँ या झीलें नहीं हैं, वहाँ पर भूजल पर निर्भर रहना पड़ता है. कम दृश्यता और शुष्क क्षेत्रों में, लोग भूजल का उपयोग करते हैं. भूजल का बेहतर उपयोग करने के लिए भारत में केंद्रीय भूजल बोर्ड की स्थापना की गई है.

देश में विभिन्न योजनाएं

भारत कृषि प्रधान देश है. कृषि सिंचाई पर निर्भर करती है. इसके लिए विभिन्न योजनाएं बनाई गई है. इनमें बड़े पैमाने पर सिंचाई योजनाएँ, मध्यम पैमाने की सिंचाई योजनाएँ और लघु-सिंचाई योजनाएँ शामिल हैं. सिंचाई नहरों, कुओं और तालाबों द्वारा की जाती है. नदी जल के समुचित निवेश को सुनिश्चित करने के लिए भारत में कुछ बहुमुखी नदी घाटी योजनाएँ कार्यान्वित की जा रही हैं. बाढ़ नियंत्रण, बिजली उत्पादन, मत्स्य पालन, जल आपूर्ति, सिंचाई और नौका विहारआसान हो रहे हैं.

हमारे देश की वक्रा-नांगल योजना, हीराकुंड बांध योजना, तुंगभद्रा योजना, नागार्जुन सागर योजना, राजस्थान नहर योजना, कोशी योजना, दामोदर उपाध्याय योजना और अन्य प्रमुख बहुआयामी योजनाएं लोगों को लाभ पहुंचा रही हैं.

जल चक्र            

समुद्री जल से नमक बनाया जाता है. नमक को अलग करना और इसे पीने के पानी में बदलना महंगा है. समुद्र का पानी वाष्पित आकार में आकाश में जाकर बादल सृष्टि करता है. बादल बारिश हो कर धरती पर बरसते हैं. वर्षा का पानी मिट्टी में प्रवेश करता है और भूमिगत रूप से संग्रहीत हो कर रहता है. कुछ पानी नदियों में बह जाता है और वापस समुद्र में चला जाता है. मानव उपयोग के बाद कुछ पानी वाष्पित हो जाता है. इस तरह जल का चक्र चलता है.

गर्मियों में देश के कुछ हिस्सों में जल का अभाव दिखाई देता है. पीने के पानी की भारी कमी होती है. कुछ जगहों पर लोग दूषित पानी पीने को मजबूर होते हैं. नतीजतन, वे बीमार हो जाते हैं. इसलिए जल संसाधनों के संरक्षण के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए. जल प्रदूषण नियंत्रण कानून के तहत हमारे देश की नदी के पानी की गुणवत्ता की रक्षा के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. गंगा का पानी कई कारणों से प्रदूषित है. भारत सरकार इस नदी को जल प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कदम उठा रही है. सब कुछ अकेले कानून से नहीं हो सकता. इसके लिए जन जागरूकता की आवश्यकता है. जल संसाधन दिवस के उत्सव के माध्यम से पानी के संरक्षण और नियंत्रण के लिए व्यापक प्रचार वांछनीय है. इंसानों और जानवरों के शवों को नदी में बहा देने से पानी दूषित होता है. इन सबका विरोध करना हमारा कर्तव्य है. अगर हम पानी का ध्यान रखेंगे तो पानी हमारी देखभाल करेगा. भविष्य में उपयोग के लिए घर की छत पर या अन्य जगहों पर बारिश के मौसम में के पानी का भंडारण करके किया जा सकता है. भूजल स्तर गिर रहा है. चिंता है कि इस जल संकट से भविष्य में तीसरा विश्व युद्ध हो सकता है. इसलिए पानी बर्बाद न करने में ही समझदारी है.

जल मानव जीवन को बचाता है और सामाजिक और आर्थिक जीवन को समृद्ध करता है. जल पथ पर शिपिंग होता है. मूल्यवान मोती समुद्र से एकत्र किए जाते हैं और मछलियों पकड़ा जाता है. इसे पानी से बिजली पैदा करके मानव दैनिक गतिविधियों में निवेश किया जा रहा है. आधुनिक मनुष्यों के लिए बिजली के बिना चलना मुश्किल है. यदि मेरु क्षेत्र की चोटियों पर बर्फ और ऊंचे पहाड़ों की चोटी पर बर्फ को पिघलाया जा सकता है और मानव सेवाओं के लिए उपयोग किया जाता है, तो दुनिया की पानी की कमी कुछ हद तक दूर हो जाएगी.

  • वायु प्रदूषण पर निबंध
  • पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध
  • भूकंप पर निबंध
  • मृदा संरक्षण पर निबंध
  • जल संकट और समाधान पर निबंध

तो ये था जल संरक्षण पर निबंध (Essay on water conservation in Hindi) . आशा है कि आप इस लेख को अच्छी तरह से समझ गए होंगे. अगर आपको जल संरक्षण के बारे में और कुछ पता है, तो कमेंट करके जरूर बताएं. मिलते है अगले लेख में. धन्यवाद.

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जल संरक्षण पर निबंध | Water Conservation Essay in Hindi

जल, मनुष्य को प्रकृति द्वारा दिया गया एक अनमोल तोहफा है। बिना जल के हम एक दिन भी नहीं काट सकते। आप में से कई

Editorial Team

December 17, 2021

Water-Conservation-In-Hindi

जल, मनुष्य को प्रकृति द्वारा दिया गया एक अनमोल तोहफा है। बिना जल के हम एक दिन भी नहीं काट सकते। आप में से कई लोगों ने पानी की समस्या को झेला होगा। वे लोग इस बात को बेहतर समझेंगे की जल कितना आवश्यक है और हमारे लिए इसे बचाये रखना भी कितना ज़रूरी है। आज का हमारा लेख जल संरक्षण पर निबंध इसी विषय पर है – जल संरक्षण और साथ ही जल संरक्षण का महत्व, जल संरक्षण की विधियाँ और जल संरक्षण के उपाय करना बहुत ही जरुरी है। जल संरक्षण पर स्लोगन और जल संरक्षण पर कविता, इन सब की जानकारी भी आपको यहाँ मिलेगी।

Table of Contents

भविष्य में जल की कमी को देखते हुए इसे सुलझाने के लिये जल संरक्षण पर अधिक जोर दिया जा रहा है। भारत ही नहीं अपितु दुनिया के दूसरे देशों में जल की भारी कमी देखी जा सकती है जिनमें से कई देश तो ऐसे है जहां के आम लोगों को पीने के पानी के लिये काफी मशक्क्त एवं लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

वहीं दूसरी ओर, जहां पर जल के पर्याप्त स्त्रोत उपलब्ध है वे अपने दैनिक जरुरतों से ज्यादा पानी बर्बाद कर रहें है। इसलिए हम सभी को जल के महत्व और भविष्य में जल की कमी से संबंधित समस्याओं को समझना चाहिये एवं जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहिए।

तो दोस्तों, अगर आप जल संरक्षण पर निबंध या जल संरक्षण के महत्व या जल संरक्षण के तरीको के बारे में जानना चाहते है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए है। हमने जल संरक्षण पर भाषण और जल संरक्षण पर स्लोगन और कविता भी इस लेख में दिए है। आप चाहे तो इस जल संरक्षण पर निबंध PDF में भी बना सकते है। अगर आप जल संरक्षण के बारे में और अधिक जानना चाहते है और इससे कुछ सीखना चाहते है, तो हमारे इस लेख को अंत तक ज़रूर पढ़िए।

Water Conservation In Hindi

जल संरक्षण का अर्थ

(Jal Sanrakshan Kise Kahate Hai)

आप सभी ये तो जानते ही होंगे की पानी की मात्रा अब धीरे-धीरे कम होते जा रही है, और हमे पानी को बचाने की ज़रूरत है।

जल के इस्तेमाल को काम करने, उसे प्रदूषित होने से बचाने और कृषि और निर्माण के कार्यो के लिए उसे पुनः चक्रित करने की प्रक्रिया को जल संरक्षण कहते है।

इस प्रक्रिया में हम जल को जमा करते है और उसे रीसायकल करके पुनः इस्तेमाल करते है। इससे हम जल के उपयोग को 40% तक कम कर सकते है। जल संरक्षण निबंध 3000 शब्द प्राप्त करने के लिए पूरा लेख जरूर पढ़े।

जल संरक्षण पर छोटे तथा बड़े निबंध (Short and Long Essay on Save Water in Hindi)

जल संरक्षण पर निबंध 250 शब्द.

short essay on jal sanrakshan in hindi

 (Jal Sanrakshan Par Nibandh / Water Conservation Essay In Hindi)

माना जाता है कि आज से 3.7 अरबो साल पहले, पृथ्वी ठंडी हुयी थी, जिससे महासागरों का निर्माण हुआ था। यहीं से जल का सिलसिला शुरू हुआ था और तब से ले कर अब तक, जल कई जीवित प्राणियों के जीवन का आधार बना हुआ है।

पृथ्वी का 70% भाग पानी से घिरा हुआ है, पर इसका सिर्फ 3% भाग ही हमारे इस्तेमाल करने लायक है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, हमे पानी को बहुत ही सोच समझ कर इस्तेमाल करना चाहिए, और इसे बर्बाद होने से रोकना चाहिए।

पानी हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसके बिना हमारा काम बिलकुल ही नहीं चल सकेगा। पुरे दिन में हम न जाने कितनी बार पानी का इस्तेमाल करते है, कितने ही भिन्न भिन्न कामो के लिए। प्यास बुझाने से लेकर अनाज उगाने तक, हर काम में पानी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हमारी इतने सालो की लापरवाही की वजह से आज हमारा सबसे मूल्यवान संसाधन खत्म होने की कगार पर है। पृथ्वी पर पानी का स्तर दिन-ब-दिन घटते जा रहा है, और इसका सबसे बड़ा कारण है हमारे ही द्वारा किया गया पानी का दुरुपयोग।

हमारी रोज की दिनचर्या में हम कितना पानी बर्बाद करते है। हम खेती करने के लिए हर ज़रूरी चीज़ो का इस्तेमाल करते है, जैसे कीटनाशक, रासायनिक उर्वरक आदि। पर हम ये भूल जाते है कि इन चीज़ो के प्रयोग से जल प्रदूषित हो रहा है।

अब वक़्त आ गया है कि हम अपनी गलतियों को सुधारे और अपने और अपनी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोचे। अगर हमने आज कुछ सख्त कदम नहीं उठाये, अपनी आदतों को नहीं बदला, तब आगे चल कर हमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

इसलिए, अब हम सभी को आगे आकर जल का संरक्षण करना पड़ेगा और ये तभी होगा जब हम जल के महत्व को समझेंगे और इससे जुड़ी कई और महत्वपूर्ण बातों को भी जानेंगे।

तो अगर आप जल संरक्षण के महत्व के बारे में या इसे संरक्षित करने के तरीको के बारे में भी जानना चाहते है, तो हमारे अगले निबंध को भी ज़रूर पढ़े और इससे शिक्षा लेकर जल को बचाये, क्योंकि “जल ही जीवन है।

जल संरक्षण पर निबंध हिंदी में (300 शब्द)

मानव जीवन की तीन मूलभूत अवश्यकताओं में जल सबसे प्रमुख है। जल ही जीवन है और धरती पर जीवन के अस्तित्व को बनाये रखने के लिये जल का संरक्षण और उसके बचाव करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि बिना जल के जीवन बिलकुल भी संभव नहीं है। पूरे ब्रह्माण्ड में केवल धरती ही एक मात्रा ऐसा गृह है जहां जल और जीवन मौजूद है।

मनुष्य जीवन में पानी की आवश्यकता को देखते हुए है भविष्य में जल को बचाने के लिये हम सब को मिलकर जल संरक्षण करना होगा। अगर भविष्य में जल की कमी को अभी से गम्भीरता से नहीं लिया गया, तो आगे चलकर जल की पूरी दुनिया में भारी कमी की समस्या हो सकती है।

भारत में राजस्थान ऐसा राज्य है जहां पर यह सुना जाता है कि वहां की अधिकतर लड़कियाँ स्कूल नहीं जा पाती, क्योंकि उन्हें पानी लाने के लिये काफी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है जिससे उनका पूरा दिन खराब हो जाता है तथा इसलिये उन्हें किसी अन्य काम के लिये समय ही नहीं मिलता।

भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसकी लगभग 60% अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर करती है। सूखा, कम उपज की कीमतें, बिचौलियों द्वारा शोषण और ऋण का भुगतान करने में असमर्थता इत्यादि कारणों से कई भारतीय किसानों द्वारा आत्महत्या की जाती है।

राष्ट्रीय अपराध रिकार्डस् ब्यूरो के सर्वेक्षण के रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 16,632 किसान (2,369 महिलाएँ) आत्महत्या के द्वारा अपने जीवन को समाप्त कर चुकें है, हालांकि जिनमें से 14.4% मामले सूखे के कारण घटित हुए है।

जल संरक्षण का महत्व और आवश्यकता 

( Jal Sanrakshan Ka Mahatva aur Avashyakta )

ये तो हम सब मानते है की जल हमारे सबसे बहुमूल्य संसाधनों में एक है। आश्चर्य की बात तो ये है कि इतना बहुमूल्य होने के बावजूद हम लोग पानी के नल को खुला छोड देने से नहीं डरते, इसे बर्बाद करने से नहीं डरते।

हम अपनी हर छोटी बड़ी चीज़ो को बचाते है पर इतनी बड़ी और सीमित चीज़ को बचाने का ख्याल हमारे मन में क्यों नहीं आता? जल को संरक्षित करना हमारे लिए बहुत ज़रूरी है।

अभी हम इसके महत्व को नहीं समझ रहे है पर बाद में जब ये ख़तम हो जायेगा, तब हम समझ कर भी कुछ कर नहीं सकेंगे। तो सबसे पहले आपको जल संरक्षण के महत्व या जल संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानना होगा।

सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण है कि जल के बिना हम जी नहीं सकेंगे। वो कहते है ना- “जल ही जीवन है”। हमारे Ecosystem को बचाने के लिए हमे जल को प्रदूषित होने से बचाना पड़ेगा।

Jal Sanrakshan Par Nibandh

कितने ही जलीय जानवरों के लिए प्रदूषित जल में रहना हानिकारक साबित हो रहा है। कितने ही जानवर इस वजह से विलुप्त होते जा रहे है। तो इन जानवरो को बचाने के लिए हमे जल को बचाने और उसे साफ़ रखने की ज़रूरत है।

जल साफ़ रहेगा तो प्रकृति भी सुरक्षित रहेगी। जल के संरक्षण से energy की भी बचत होती।

अगर हम अभी प्राकृतिक तरीके से जल के खपत को कम कर देंगे और जलाशयों को साफ़ रखेंगे, तो हमे भविष्य में पैसे खर्च कर के जल पीने और बचाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

तो अब आप समझ गए होंगे कि जल संरक्षित करना क्यों आवश्यक है और जल संरक्षण का महत्व क्या है।

भारत में जल संरक्षण की विधियाँ / तरीके

( Water Conservation Methods/Techniques In India )

जल हमारे जीवन का एक बहुमूल्य हिस्सा है, जो हमारे जीवन जीने में हमारी मदद करता है। लेकिन कुछ वर्षो से, जल की सीमा कम होती जा रही है और अगर ऐसा ही चलता रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब पृथ्वी पर जल की मात्रा बिलकुल ही शुन्य हो जाएगी।

इससे पहले की ऐसा कुछ हो, हमे इससे बचने के उपाय ढूंढ़ने होंगे और इसे संरक्षित करना होगा, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को जल के लिए तड़पना ना पड़े।

भारत में, जल संरक्षण के कई आधुनिक और नवीन तरीको का इस्तेमाल किया जाता है। इन तरीको के इस्तेमाल से पानी की बचत भी की जाती है और साथ ही नमकीन पानी को पीने वाले मीठे जल में भी परिवर्तित किया जाता है।

आइये हम आपको जल संरक्षण की आधुनिक विधियों से रुबरु कराते है, जिससे हम जल को संरक्षित कर सकते है।

यह जल संचयन का सबसे आसान, प्रभावशाली और बहुत ही किफायती तरीका है, जो विशेष कर बड़े-बड़े मकानो के छतों पर किया जाता है। यह तरीका अपनाने से उस क्षेत्र के भूजल स्तर में भी वृद्धि होती है।

इस प्रणाली का इस्तेमाल बारिश के पानी को इकठ्ठा करने के लिए किया जाता है। इस प्रणाली में वर्षा के पानी को छत की टंकी में जमा किया जाता और इसे Artificial Recharge System में मोड़ दिया जाता है, जहाँ से इसे बाद में इस्तेमाल किया जा सके।

इस प्रणाली के उपयोग से पानी की खपत को 40% कम किया जा सकता है और साथ ही, सड़क पर पानी और मिटटी के बहाव को रोका जा सकता है।

यह टंकी, महंगे संचयन तरीको के विकल्प में, एक सस्ता और किफायती तरीका है, जो कि सिर्फ प्लास्टिक और चिनाई से बनता है। यह उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों में बहुत प्रभावी साबित हुआ है, जहाँ अधिक पानी संग्रहित करने की ज़रूरत पड़ती है।

वर्षा का जल इन टंकियों में जमा होता है, जिससे खेतो में पानी जमने की परेशानी से बचा जा सकता है और इस पानी को बाद में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ये प्रणाली किसानो और मजदूरों द्वारा आराम से अपनायी जा सकती है।

तो दोस्तों, इन तकनीकों को अपना कर हम जल को संरक्षित करने में मदद कर सकते है। आप भी अपने घरो के छतों पर Rooftop Rainwater Harvesting तकनीक का इस्तेमाल कर सकते है।

जल संरक्षण के उपाय। 

(Jal Sanrakshan Ke Upay)

हम सभी जानते है कि ” जल ही जीवन है” और ‘जल है तो कल है”।

पर पता नहीं क्यों, ये जानते हुए भी हम इसे सुरक्षित रखने के लिए कुछ करते नहीं है। अपनी ज़रूरत के अनुसार बस इसका हद से ज़्यादा उपयोग करते ही जाते है।

हम ये क्यों नहीं सोचते कि अगर पानी ख़त्म हो गया तब हम क्या करेंगे? तब अपनी प्यास कैसे बुझाएंगे? तब अनाज कैसे उगाएंगे? ये तो सोचने वाली बात है ना?

चलिए अभी तक नहीं सोचा है तो अब सोच लीजिये। वो कहते है ना “जब आँख खुले तब सवेरा”, तो बस उसी तरह अब जब आप पानी के महत्व को समझ गए है, तो इसे बचाया कैसे जाये इस बारे में सोचिये।

तो सबसे पहले हम अपने घर से शुरुवात करते है। जैसे हर नए काम की शुरुआत घर से ही होती है, वैसे ही पानी की बचत भी सबसे पहले हमे घर में ही करनी पड़ेगी। इसके लिए रोज के पानी के खपत को हमे कम करना पड़ेगा, जब ज़रूरत ना हो तो नल बंद है, ये ध्यान में रखना पड़ेगा, तालाबों पर जा कर अपने घरेलु कामो की वजह से जो हम उसे दूषित करते है, उसे बंद करना होगा।

घर के बाद अब हम बाहर निकलते है। आज, बढ़ती आबादी के साथ कचरे के ढेर भी बढ़ते जा रहे है, और ये सारे कचरे घुम फिर के जल निकायों में ही जमा होते है। हमे यहाँ ये करना होगा कि हम अपने कचरे जल स्रोतों में नहीं फेकें। जो भी कचरे है उसे सही तरह से निपटाने की ज़रूरत है।

सिचाईं के तरीकों में हमे बदलाव लाना होगा। हमे सिचाईं के आधुनिक तरीको को अपनाने की ज़रूरत है। इससे 50% पानी की बचत होगी। साथ ही खेती में इस्तेमाल किये जाने वाले कीटनाशकों का प्रयोग कम करना होगा। तभी कुल मिला कर हम जल में हो रहे प्रदूषण को कम कर सकेंगे।

हम जितना कम जल प्रदूषित करेंगे, उतना ही जल हमारे लिए संरक्षित होता जायेगा। ये कुछ उपाय है जो आप अपनी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में करके जल का संरक्षण कर सकेंगे। हर इंसान अगर अपने हिस्से का काम करने लगे तो बहुत बदलाव आ सकेगा।

जल संरक्षण स्लोगन हिंदी में। 

( Water Conservation In Hindi Slogan )

short essay on jal sanrakshan in hindi

जल संरक्षण पर भाषण

( Jal Sanrakshan Hindi Speech )

माननीय प्रिंसिपल, आदरणीय शिक्षक और मेरे सभी प्रिय मित्रो – मैं आप सभी का आज के इस कार्यक्रम में स्वागत करता हूँ।

आज हम सब यहाँ जमा हुए है, तो अगर यहाँ मौजूद मेरे अध्यापको की अनुमति हो, तो मैं आप सभी के सामने कुछ कहना चाहता हूँ। मैं जिस विषय पर बात करने जा रहा हूँ, यह बहुत ही चिंतन करने वाली बात है।

हम सभी जानते है कि हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार जल है। जल के बिना हमारा जीवन संभव नहीं हो सकता। हम सारे दिन में कितनी ही बार, कितने ही कामो के लिए पानी का इस्तेमाल करते है। पर क्या आपने कभी ये सोचा है कि अगर ये पानी हमे न मिले, तो क्या होगा? अगर किसी दिन अचानक पानी का सप्लाई बंद हो जाये, तो हमारा काम कैसे चलेगा?

ये एक बहुत ही सोचने वाली बात है, वो अलग बात है कि हम हर छोटी छोटी बात के बारे में तो सोचते है, पर इस गंभीर बात को नज़रअंदाज़ कर देते है। लेकिन जल हमारे जीवन का आधार है और इसके बिना हम जीवित ही नहीं रह सकते।

जो चीज़ हमारे लिए इतनी मूल्यवान है, उसकी रक्षा करने की ज़िम्मेदारी भी तो हमारी ही बनती है न? ये हमारा कर्त्तव्य है की हम पानी को बर्बाद होने से रोके, उसका सदुपयोग करे। कल की समस्या को रोकने के लिए हमे आज से मेहनत करनी पड़ेगी।

इसी बात पर मैं आप सभी से ये गुज़ारिश करता हूँ कि आप सभी अपने अपने हिस्से का काम करें और जितना हो सके पानी बचाएँ, ताकि इसका भुगतान हमे ही आगे चल के न करना पड़े।

आप सभी ने मेरी बातों को धैर्यतापूर्वक सुना इसके लिए शुक्रिया।आप सभी का दिन मंगलमय हो।

जल संरक्षण पर कविता

 (Poem On Water Conservation)

जल ही जीवन है, इसे ना यु बर्बाद करो।

इतनी सी ये बात है, इसे समझने की तो कोशिश करो।

आज जो ख़तम हो गया पानी,

तो कल क्या करोगे?

आज जी भर पी लोगे पानी,

तो क्या कल से प्यासे रह पाओगे?

अब जो नहीं समझोगे जल की कीमत।

तो कल बहुत पछताओगे।

शायद तुम्हे न हो तकलीफ जल की,

तुम्हारी पीढ़िया ज़रूर भुगतेगी कल की।

अब भी वक़्त है संभल जाओ,

खुद को तैयार करो और आजाओ,

मिल कर बचत करे जल की।

तो दोस्तों, उम्मीद है आपको आज का ये लेख पसंद आया होगा और आप इससे कुछ न कुछ शिक्षा ज़रूर लेंगे और अपने जीवन में इसका इस्तेमाल करेंगे। अगर आपको ये लेख अच्छा लगा तो इसे अपने मित्रो के साथ Share करें और अपने विचार या कोई सवाल हमें Comment में लिख के बताएं।

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जल संरक्षण पर निबंध | Essay on Water Conservation in Hindi

आज इस आर्टिकल में हम “जल सरंक्षण पर निबन्ध। 10 Lines Paragraph And Essay on Water Conservation in Hindi। Jal Sanrakshan Par Nibandh in 500 Words” लिखने जा रहे है।

जल हमारे भविष्य के लिए बहुत ही उपयोगी है। जल के बिना जीवन संभव नही हैं।अतः यह कहना गलत नहीं होगा कि जल ही जीवन है। जल का उपयोग हम पानी पीने, खाना बनाने एवं रोजमर्रा का काम पूरा करने के लिए करते है।

Essay On Water Conservation In Hindi

पृथ्वी पर जल का होना बहुत जरूरी है बिना जल के पृथ्वी की संरचना होना भी बहुत मुश्किल था। पृथ्वी पर यूं तो  71%  जल है लेकिन पीने योग्य एवं सिंचित योग्य जल सीमित है। पृथ्वी पर पीने योग्य एवं सिंचित योग्य जल केवल 3% है जो हमें नदियों, झरनों, तालाबों एवं भूजल के स्रोतों से प्राप्त होता है।  

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सौर मंडल में कुल नौ ग्रहों में से केवल एक ही ग्रह है जिसमें पानी की उपलब्धता है और वह ग्रह हमारा पृथ्वी है। जल की उपलब्धता के कारण ही हमारा जीवन है जिससे पेड़ पौधे, जीव जंतु, मनुष्य आदि सब संचालित होते हैं। 

जल की महत्वता का अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि जल के ना होने या कमी होने से समाज में लड़ाई दंगे होते रहते हैं। प्रत्येक चुनावों में जल को सामाजिक मुद्दों में शामिल किया जाता है, कई देशों में जल बंटवारे के लिए बहस होती रहती है। इससे जल संरक्षण का महत्व बढ़ जाता है।

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जल संरक्षण का अर्थ

जल संरक्षण से मतलब यह है कि हमें जल को किस प्रकार से बचाना चाहिए क्योंकि हमारी पृथ्वी पर पीने योग्य एवं फसल योग्य जल की उपलब्धता बहुत ही सीमित है। जल को संरक्षण करने के लिए हमें अपने बाग बगीचे में फव्वारा पद्धति का उपयोग करना चाहिए। 

जल के रिसाव को रोकने के लिए पाइपलाइन एवं नलों को ठीक से जोड़ना चाहिए। हमें कपड़े धोने के लिए बाल्टी का इस्तेमाल करना चाहिए ना कि सीधे खुले नल का, जिससे पानी की बचत होती है । 

जल सरंक्षण के उपाय

जल को संरक्षण करने के लिए हमें हमारे छत पर से बरसात के मौसम में पाइप के रास्ते जमीन पर पक्का खड्डा बनवा कर उसको काम में लेना चाहिए क्योंकि वर्षा का जल बहुत ही उपयोगी होता है, वर्षा का जल पीने योग्य वन मीठा होता है।

कई इलाकों में जहां खारे पानी की समस्या रहती है, वहां पर बरसात का पानी पीने में उपयोग लेना चाहिए। इस तरह के प्रबंधन होने से  बरसात के पानी, जो व्यर्थ ही रास्तों गलियों  इत्यादि में बह जाता है उसका प्रबंधन  किया जा सकता है एवं उपयोग में लिया जा सकता है। 

जल संरक्षण के लाभ

जल का संरक्षण होने से भूमि का जल स्तर बढ़ जाता है। वर्षा से उपलब्ध जल का उपयोग हम पीने का पानी एवं कपड़े धोने के लिए एवं फसलों में देने के लिए कर सकते हैं। वर्षा जल  फसलों में किसी वरदान से कम नहीं है एवं इससे फसल अच्छी होती है। 

कपड़े धोने के लिए मशीन का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे पानी का कम खर्च हो। होली का त्योहार मनाने के लिए सूखा रंग लगाना चाहिए जोकि पानी के लिए भी एवं शरीर के लिए भी सुरक्षित होगा। हमें बगीचे एवं फसल में पानी देने का समय सायं काल या प्रातः काल में सिंचित करना चाहिए क्योंकि दोपहर के समय में वाष्पीकरण होता है जिससे ना तो पौधों को सही तरह से पानी मिलता है एवं पानी का भी नुकसान होता है।

पृथ्वी पर उपयोगी जल को बचाने के लिए हमें नदियों को स्वच्छ रखना बहुत ही आवश्यक है। कई फैक्ट्रिया उत्पादन के बाद बच रहे रसायनिक तत्व जो कि हानिकारक होते हैं को नदियों में मिला देती हैं इससे नदियां प्रदूषित होती है एवं इस प्रदूषण से पीने का पानी भी खराब हो जाता है। खराब पानी पीने से बीमारी का खतरा हो जाता है। इससे जल में रहने वाले मछलियां और जीव जंतु का नुकसान होता है इसलिए नदियों का पानी हमें हमेशा स्वस्थ रखना चाहिए। गंदा पानी पीने से कई बीमारियां हो जाती हैं।

स्वच्छ गंगा मिशन के तहत सरकार ने गंगा नदी को पवित्र करने के लिए अभियान चलाया है जो कि एक बहुत ही सराहनीय कदम है। ऐसे ही प्रयास हमें भी अपने घर एवं आसपास होने वाले जलभराव को रोकना चाहिए एवं व्यर्थ बह रहे पानी को रोकना चाहिए।

Conclusion Essay On Water Conservation In Hindi

अतः दोस्तों, प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छ जल उपलब्ध हो सके एवं सभी को जल उपलब्ध हो सके, इसके लिए जल संरक्षण के महत्व को समझना होगा एवं जल संरक्षण को बढ़ावा देना होगा। जिससे की हमें खुशहाल एवं स्वस्थ जीवनशैली की ओर अग्रसर हो सके।तो आशा करते है आपको यह “जल संरक्षण पर निबंध (Essay On Water Conservation In Hindi)” पसन्द आया होगा।

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About Kavish Jain

में अपने शौक व लोगो की हेल्प करने के लिए Part Time ब्लॉग लिखने का काम करता हूँ और साथ मे अपनी पढ़ाई में Bed Student हूँ।मेरा नाम कविश जैन है और में सवाई माधोपुर (राजस्थान) के छोटे से कस्बे CKB में रहता हूँ।

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दा इंडियन वायर

जल संरक्षण पर निबंध

short essay on jal sanrakshan in hindi

By विकास सिंह

water conservation essay in hindi

विषय-सूचि

जल संरक्षण पर निबंध, water conservation essay in hindi (200 शब्द)

water crisis essay in hindi

जीवन की शुरुआत से ही पानी इतना महत्वपूर्ण है कि सभी प्रमुख सभ्यता दुनिया में नदी के पास होती है। भारत में प्रमुख शहरों को विकसित करने में नदियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं क्योंकि नदी के माध्यम से परिवहन बहुत आसान है। आजकल वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर जीवन के बारे में बात कर रहे हैं क्योंकि उन्हें हवा में कुछ जमे हुए पानी के कण और नमी मिली थी।

वैज्ञानिक अभी भी जीवन की खोज कर रहे हैं, लेकिन मुख्य बिंदु यह है कि पानी की उपलब्धता के कारण हम जीवन की कल्पना कर सकते हैं अन्यथा जीवन की कोई संभावना नहीं है, इसलिए हम यह भी कह सकते हैं की जल ही जीवन है।

पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन के लिए पानी महत्वपूर्ण है यानी समुद्र से पानी वाष्पित होता है और वायु को जल वाष्प के रूप में जोड़ता है और बादल में बदल जाता है। जब बादल समुद्र से सादे क्षेत्र में स्थानांतरित हो जाता है, और ठंडा हो जाता है, तो यह बारिश में परिवर्तित हो जाता है और नदी और भूजल को फिर से भर देता है।

जल संरक्षण पर निबंध, water conservation essay in hindi (300 शब्द)

short essay on jal sanrakshan in hindi

पानी एक ऐसा पदार्थ है जिसके बिना हम अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा, हमारी प्यास बुझाने के लिए, इस पारदर्शी रासायनिक पदार्थ का उपयोग कई अन्य प्रयोजनों के लिए किया जाता है। इसका उपयोग कई घरेलू कार्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

पानी का उपयोग कृषि उद्देश्य के लिए भी किया जाता है और औद्योगिक उपयोग के लिए इसकी आवश्यकता होती है। यहां विभिन्न स्थानों पर इसका उपयोग कैसे किया जाता है, इस पर एक संक्षिप्त नज़र है।

कृषि उपयोग:

यह दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले पानी का लगभग 70% है। कृषि में, पानी का उपयोग मुख्य रूप से सिंचाई के उद्देश्य से किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इसका उपयोग पशुओं के प्रजनन के लिए भी किया जाता है। सिंचाई के लिए उपयोग होने वाला अधिकांश पानी नदियों से निकाला जाता है। भूजल का उपयोग इस उद्देश्य के लिए भी किया जाता है।

इस प्रकार नदियों को किसानों के लिए बहुत महत्व का कहा जाता है। न केवल वे सिंचाई के लिए पानी प्रदान करते हैं बल्कि वे जल चक्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

औद्योगिक उपयोग:

पानी के औद्योगिक उपयोग में विभिन्न उत्पादों को धोने, पतला करने, ठंडा करने, परिवहन, निर्माण, निर्माण और प्रसंस्करण के लिए उपयोग किया जाने वाला पानी शामिल है। थर्मल पावर प्लांट, इंजीनियरिंग और लुगदी और कागज उद्योग सबसे अधिक पानी की खपत करते हैं।

घरेलू उपयोग:

घर में पानी का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से शराब पीना, खाना बनाना, नहाना, बर्तन धोना, कपड़े धोना, घरों की सफाई, कार और अन्य वाहन, पौधों को पानी देना और स्वच्छता के उद्देश्य से शामिल हैं।

प्रत्येक देश में पानी की आपूर्ति की अपनी प्रणाली है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पानी हर घर तक पहुंचे ताकि उसके नागरिकों की उपरोक्त बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सके। जबकि पानी का उपयोग सफाई, धुलाई और स्नान के उद्देश्य के लिए किया जाता है, इसे पीने से पहले शुद्ध करने की आवश्यकता होती है और खाना पकाने के उद्देश्य से इसका उपयोग करने से पहले।

निष्कर्ष:

जल मानव जाति के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, दुर्भाग्य से यह दुनिया भर में तीव्र गति से बर्बाद हो रहा है। सभी को पानी बचाने की दिशा में अपना योगदान देना चाहिए।

वर्षा जल संरक्षण पर निबंध, rain water conservation essay in hindi (400 शब्द)

save water save earth poster in hindi

प्रस्तावना:

हमारी धरती मां ने हमेशा हमारी रक्षा की है और हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि हमें वह सब कुछ मिले जिसकी हमें जरूरत है। मानव जाति के हित के लिए सभी प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। लेकिन दुख की बात है कि बदले में हमने इन संसाधनों का केवल शोषण और दुरुपयोग किया है। जल एक प्राकृतिक संसाधन है जो सभी जीवन रूपों की आधारशिला है।

यह माना जाता है कि पृथ्वी पर जीवन का पहला रूप पानी में पैदा हुआ था। यह स्पष्ट तरल जीवित दुनिया की रीढ़ के रूप में चलता है। हमने इस संसाधन का न केवल दुरुपयोग किया है, बल्कि इसे दुर्लभ भी बना दिया है। हमने नदियों, समुद्रों को प्रदूषित किया है और भूमिगत जल के स्तर को भी बिगाड़ दिया है।

पानी बचाओ धरती बचाओ:

हम पानी के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं इसलिए हमें महसूस करना चाहिए कि यह बहुत महत्वपूर्ण है। शोध के अनुसार यह ज्ञात है कि पृथ्वी पर सभी पानी के ताजे पानी का केवल 1% है। हम इंसान इसे किसी भी चीज की तरह बर्बाद कर रहे हैं। वो दिन दूर नहीं जब पानी सोने जैसा महंगा होगा। ऐसे कई तरीके हैं जिनमें हम नीचे दिए गए पानी की बर्बादी में योगदान दे रहे हैं-

  • उपयोग में न होने पर नल को खुला छोड़ना।
  • जरूरत न होने पर लॉन और पार्कों में पानी छिडकाव करना।
  • पानी का पुन: उपयोग नहीं करना: अधिकांश पानी का पुन: उपयोग किया जा सकता है इसलिए बहुत अधिक बचत की जा सकती है।
  • नदियों और अन्य जल निकायों को प्रदूषित करना।
  • अनियोजित जल प्रबंधन।
  • वनों की कटाई से भूमिगत जल की हानि भी होती है।

हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमारे शरीर का लगभग 70% हिस्सा पानी है, अगर पृथ्वी पर पर्याप्त पानी नहीं है तो हम जीवित कैसे रहेंगे। हम अपने दैनिक कार्यों में इतना पानी बर्बाद करते हैं जैसे कि कार, सब्जियां, कपड़े आदि धोना।

जल्द ही एक ऐसा समय आएगा जब हमारे अस्तित्व के लिए बहुत कम या कोई पानी नहीं होगा। पहले से ही बहुत कम पानी है जो उपयोग करने के लिए फिट है और शेष को भस्म होने से पहले शुद्धिकरण की एक लंबी प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। हमें ऐसे तरीकों की आवश्यकता है जहां पानी का उचित प्रबंधन किया जाना चाहिए।

यह सही समय है कि हम महसूस करते हैं कि हम अपने लिए एक बहुत बड़ी समस्या पैदा कर रहे हैं और परिणाम ऐसा होगा कि हम उनसे निपटने में सक्षम नहीं होंगे। पानी के बिना पूरा जीवित राज्य मर जाएगा और जल्द ही हमारे पास बंजर धरती होगी। धरती माता को बचाने के लिए पानी को जगाओ और बचाओ।

जल संरक्षण पर निबंध, water conservation essay in hindi (500 शब्द)

short essay on jal sanrakshan in hindi

ग्लोबल वार्मिंग की सबसे बड़ी समस्या निस्संदेह पृथ्वी पर एक विशाल जल ह्रास है जो मुख्य रूप से पूरे ग्रह पर पानी के दुरुपयोग के कारण है। आज के समय में “ जल बचाओ पृथ्वी बचाओ ” के सूत्र को समझने की अत्यधिक आवश्यकता है। शुद्ध पानी सभी आवश्यकताओं का प्रमुख स्रोत है, जो एक स्वस्थ जीवन जीने के तरीके से जीवित होना चाहता है।

जल संरक्षण के उपाय क्या हैं?

पृथ्वी पर सूखे की सबसे खराब स्थिति को रोकने के लिए पानी का बेहतर और कम उपयोग हमारी आवश्यकता है। इस निबंध में, हम इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि सौंदर्य हरियाली के वातावरण और पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण रूप से जीवन को बचाने के लिए पानी का संरक्षण कैसे किया जाए। अगर हम इस पर गंभीरता से सोचते हैं तो हमने पाया कि यह बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। पहले हमें अपने दैनिक जीवन से शुरुआत करने की जरूरत है।

हमारी नई पीढ़ी को “पृथ्वी बचाओ धरती बचाओ” के सूत्र को समझने की अत्यधिक आवश्यकता है। हम इसे अपने जीवन के हर सेकंड में सहेज सकते हैं। एक छोटा कदम पानी की बचत में सैकड़ों गैलन जोड़ सकता है। यहाँ कुछ बिंदु हैं जिन्हें हमें अपने दैनिक जीवन में ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

नियमित गतिविधियों के दौरान थोड़ी सावधानी बरतें जैसे कि ब्रश करते समय नल बंद करना, हाथ धोना और शेविंग करने से प्रति माह भारी मात्रा में लगभग 160 गैलन पानी बच सकता है। शॉवर लेने के बजाय बाल्टी का उपयोग भी पानी बचाने के संबंध में जरूरतमंदों को करेगा।

दोपहर के बजाय सुबह और शाम के समय में पौधों को पानी देना हमेशा पानी को बचाने के लिए बेहतर उपाय है, हालांकि वसंत के मौसम में पेड़ लगाना भी समाधान में जोड़ा जा सकता है। बिना देरी किए अनावश्यक पानी की कमी को रोकने के लिए घर में सभी रिसाव को ठीक करना आवश्यक है।

बाल्टी का उपयोग करने के बजाय, पानी की बचत के मामले में कार को पाइप से धोना हमेशा खराब विकल्प होता है। वॉशिंग मशीन और डिशवॉशर का उपयोग हमेशा पानी से बचाने में मदद करता है जब वे पूरी तरह से लोड होते हैं। अपने घर में पानी के पुनर्चक्रण की सही प्रक्रिया को लागू करें हमेशा पानी के संरक्षण के संदर्भ में एक सही निर्णय साबित होता है।

पानी का संरक्षण कुछ ऐसा है जो प्रकृति और हमारे भविष्य को सुरक्षित बनाता है। हम सभी जानते हैं कि दिन-प्रतिदिन पृथ्वी पर पानी का स्तर गिरता जा रहा है और इसके कारण हमारी प्रकृति बुरी तरह से पीड़ित है। पानी को संरक्षित करने और हमारी भावी पीढ़ी के स्वस्थ जीवन के लिए इसकी शुद्धता बनाए रखने के लिए सीखना और लागू करना बेहतर होना चाहिए।

ग्रह पर उपलब्ध पानी की वर्तमान स्थिति को देखने के बाद, पानी की एक-एक बूंद को अब सहेजने की जरूरत है। जैसा कि हम जानते हैं कि पृथ्वी का 71% क्षेत्र पानी से ढका हुआ है, लेकिन यह तथ्य की पानी का केवल 3.5% हिस्सा बचा है, जो जीवित रहने के लिए उपयोगी है, इस प्रकार, हमें अपनी भावी पीढ़ी की खातिर पानी के महत्व को समझना आवश्यक है प्राकृतिक संसाधनों का चक्र विशेष रूप से पृथ्वी का नीला भाग है जो ‘जल’ है।

जल संरक्षण पर निबंध, water conservation essay in hindi (600 शब्द)

जल संरक्षण निबंध समकालीन दुनिया की तत्काल समस्या के लिए आवश्यक है जो जल संरक्षण के आवश्यक और संभावित तरीकों के बारे में समर्पित है। निबंध का महत्व जनसंख्या की वृद्धि, घरेलू गतिविधि और बुनियादी ढांचे, और जलवायु परिवर्तन के कारण खपत पानी की मात्रा में वृद्धि से समझाया गया है। इस प्रकाश में, जल पर्यावरण की रक्षा करने और मीठे पानी को बचाने के लिए उपयोग की जाने वाली रणनीतियाँ और गतिविधियाँ जल संरक्षण निबंध में मुख्य जोर देती हैं।

ताजा पानी पृथ्वी पर सबसे मूल्यवान संसाधन है और पारिस्थितिकी तंत्र का आवश्यक घटक है क्योंकि सभी जीवित प्राणियों को अपनी जीवित प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए इसकी आवश्यकता होती है। आधुनिक उद्योग, कृषि, और प्रौद्योगिकी के विकास से विश्व में तबाही होती है, जिसके परिणामस्वरूप जल संसाधनों के प्रदूषण के साथ-साथ इसकी अधिक खपत भी होती है। जल संसाधनों के संरक्षण के लक्ष्य आवश्यकताओं की श्रेणी द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।

सबसे पहले, भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को बचाना मानवता का दायित्व है। इसके अलावा, यह इस्तेमाल की गई ऊर्जा के स्तर को कम करने में मदद करता है क्योंकि जल प्रबंधन भारी मात्रा में बिजली की खपत करता है। अंत में, पानी विभिन्न वन्यजीव प्रतिनिधियों के लिए एक निवास स्थान है। इसलिए, विश्व समुदाय जल संसाधनों को उनके पूर्ण रूप से लुप्त होने से रोकने की कोशिश करता है।

पानी की रक्षा के लिए पहला कदम लोगों को और अधिक किफायती बनने के लिए है। यदि वे नियंत्रण करते हैं कि वे बर्तन धोते समय कम से कम पानी का उपयोग करते हैं या अपने दाँत ब्रश करते हैं, तो वे बड़ी मात्रा में पानी बचा सकते हैं। अलग-अलग पानी की बचत करने वाली प्रौद्योगिकियां हैं, जैसे कि कम-प्रवाह शावर प्रमुख और शौचालय, कच्चा पानी फ्लशिंग, स्वचालित नल, और कई अन्य स्मार्ट डिवाइस, जो विशेष रूप से पानी बचाने के लिए आविष्कार किए गए थे।

यूनिवर्सल मीटरिंग में पानी की बर्बादी को कम करने के लिए एक उपयोगी तरीका माना जाता है क्योंकि यह लोगों की समझ और जिम्मेदारी को बढ़ाता है। इसके अलावा, यह पानी के रिसाव का पता लगाने में मदद करता है। कृषि में पानी के उपयोग को कम करने के लिए, एक पैन वाष्पीकरण का उपयोग किया जाता है। इस उपकरण की उपयोगी विशेषता यह है कि यह सिंचाई के लिए आवश्यक पानी की मात्रा को निर्धारित करता है। पानी की डिलीवरी के लिए फसल सुधार कारक भी हैं, जैसे बाढ़ सिंचाई, उपरि सिंचाई और ड्रिप सिंचाई।

पानी के गायब होने के अलावा, जल प्रदूषण की समस्या आजकल आधुनिक दुनिया में है। बड़े जल क्षेत्र उपयोग के लिए अपर्याप्त हो जाते हैं क्योंकि उनके प्रदूषण का स्तर अस्वीकार्य रूप से अधिक है। यह लोगों को उपभोग करने के लिए जल संसाधनों को असंभव बना देता है, और मछलियों और पौधों को रहने के लिए। प्रदूषण को रोकने के लिए, बड़े पौधों और कारखानों को अपने उत्सर्जन को नियंत्रित करना पड़ता है और उन्हें उचित उपकरण प्रदान करने के उपायों को ग्रहण करना पड़ता है, जिससे उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलती है।

नतीजतन, जल प्रदूषण और संरक्षण की समस्या मानव जाति और ग्रह के लिए सामान्य रूप से इसकी गंभीरता और नकारात्मक परिणामों के कारण अन्य पर्यावरणीय मुद्दों के बीच एक महत्वपूर्ण स्थान लेती है। जल संसाधनों को रोकने के लिए अलग-अलग तरीके हैं और इसे जल संसाधनों के उपयोग के साथ-साथ विशेष प्रौद्योगिकियों के आविष्कार के माध्यम से संरक्षित करना है। वैश्विक समुदाय को जीवित रहने के लिए ग्रह को सुरक्षित रखने के लिए जल संरक्षण एक महत्वपूर्ण मिशन है।

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इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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Suparb story

Maine padha nahi lekin Phir bhi acha laga

मेरे कॉलेज में पानी के संरक्षण पर निबंध लिखने की जरूरत पड़ी थी तो मैंने गूगल पर सर्च किया और आपकी पोस्ट लिखी आपकी पोस्ट बहुत अच्छी लगी मुझे

nice your post

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जल संरक्षण पर निबंध | Water conservation Essay in Hindi

by Editor January 19, 2019, 2:56 PM 26 Comments

जल का महत्व हम जितनी जल्दी समझ जाएँ हमारे लिए उतना अच्छा है और जल संरक्षण के प्रयास हमें अब शुरू करने की आवश्यकता है। धरती पर सीमित जल-भंडार को बचाने के लिए आज सभी को जल संरक्षण की ओर अपना ध्यान आकृष्ट करने की जरूरत है। 

जल संरक्षण पर निबंध ( 200 शब्द) 

एक तरफ धरती पर साफ पीने लायक पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ हम किसी ना किसी कारणवश धरती के अमूल्य जल को बर्बाद कर रहे हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब धरती पर पीने लायक पानी बचेगा ही नहीं। हमारी धरती पर 70% भूभाग जल का है लेकिन मात्र 1 प्रतिशत जल ही ऐसा है जो मानव अपने उपयोग में ले सकता है, बाकी का अधिकांश जल समुद्र का खारा पानी है और बर्फ़ीला है।

जल संरक्षण आज बहुत जरूरी हो गया है। अपने रोजिंदा जीवन में जिस प्रकार हम जल का दुरुपयोग करते हैं उस पर रोक लगाने की जरूरत है। दुनिया के कई देश जल की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। भारत के कई राज्यों में लोगों को पानी के लिए दूर–दूर तक जाना पड़ता है।

जल का हम सही उपयोग करें और जल के स्त्रोतों को बढ़ाएं तो पानी की समस्या से हम निजात पा सकते हैं। जल का संरक्षण करने के लिए हमें बरसात के पानी का संग्रह करना चाहिए, नदियों और अन्य पानी के स्त्रोत को प्रदूषित नहीं करना चाहिए और साथ ही साथ अपने रोजिंदा जीवन में जल का सदुपयोग करना चाहिए।

जल संरक्षण पर निबंध (3 00 शब्द) 

जल को जीवन कहा जाता है अतः इसके मूल्य को समझकर हमें जल संरक्षण पर अधिक ज़ोर देने की आवश्यकता है। धरती पर मनुष्य के उपयोग के लायक मात्र 1 प्रतिशत जल बचा है, यदि हमने सजग होकर पानी को बचाने के लिए उचित कदम नहीं उठाए तो हमारी आने वाली पीढ़ी को भारी जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

जल संरक्षण के लिए हमें सबसे पहले अपने रोजिंदा जीवन में पानी की बचत करनी चाहिए। अपने रोजिंदा कार्यों को करने के लिए हम जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करते हैं, यह एक तरह से पानी की बरबादी है अतः यह आदत हमें बदलनी चाहिए। जितने पानी की आवश्यकता हो हमें उतना ही पानी उपयोग में लेना चाहिए।

दूसरा कदम जल संरक्षण के लिए हम यह उठा सकते हैं की बरसात के जल का अधिक से अधिक संग्रह करना। बरसात के मौसम मे वर्षा का साफ जल यूं ही बर्बाद हो जाता है अतः इस जल का हमें संग्रह करना होगा। वर्षा के जल का संग्रह करने के लिए जगह-जगह छोटे-छोटे तालाब और जलाशय हम बना सकते हैं।

तीसरा काम हम ये कर सकते हैं वो यह की अपने नदी, तालाब, जलाशय को साफ रखना। जी हाँ, यदि हम नदी, तालाब आदि में प्रदूषण न करें और उन्हें शुद्ध रखें तो उनका आस्तित्व बना रहेगा। नदियों का जल हमारे लिए पानी का सबसे बड़ा स्त्रोत है अतः उनका संरक्षण हमें जरूर करना चाहिए।

इसके उपरांत वनों को कटाई पर भी रोक लगनी चाहिए क्यूंकी बरसात को लाने के पीछे वृक्षों का योगदान महत्वपूर्ण होता है अतः अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर जंगलों को बढ़ाना चाहिए।

धरती पर जल संरक्षण के लिए सभी लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है क्यूंकी सबसे अधिक पानी की बरबादी हम अपने घरों में अलग-अलग कार्यों को करने में करते हैं। जल अब सीमित मात्रा में ही बचा है अतः जितनी जल्दी हम जल संरक्षण की आदत को अपनाएं उतना हमारे लिए अच्छा है।

जल संरक्षण पर निबंध (5 00 शब्द) 

जल इस धरती की सबसे अमूल्य वस्तु है। जिस प्रकार हम हवा और भोजन के बिना जीवित नहीं रह सकते उसी प्रकार हम जल के बिना भी जीवित नहीं रह सकते। धरती पर समस्त जीवसृष्टि के लिए जल सबसे महत्वपूर्ण है। धरती पर जल का विशाल भंडार होने के बाद भी मात्र 1 प्रतिशत पानी ही हमारे उपयोग के लिए बचा है, क्यूंकी बाकी का पानी या तो खारा है या बर्फ के पहाड़ों के रूप में है।

आज सबसे अधिक आवश्यकता जल को बचाने की है क्यूंकी आने वाले समय में हमें भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। जिस प्रकार से हम अनमोल जल को बरबाद कर रहे हैं उसे देखकर तो ऐसा ही लगता है की आने वाली पीढ़ी के लिए जल बचेगा ही नहीं।

आज सबसे ज्यादा ज़ोर जल संरक्षण पर देने की आवश्यकता है।

क्या है जल संरक्षण

जल संरक्षण में पीने लायक ताजे पानी के संसाधन का रक्षण करना और वर्तमान और भविष्य में जल की मांग को पूरा करने के लिए सभी नीतियों और गतिविधियों को शामिल किया गया है। जन संख्या वृद्धि, घरेलू उपयोग और अंधा धुंध विकास के कारण पानी का उपयोग जरूरत से ज्यादा बढ़ा है। जलवायु परिवर्तन के कारण भी जल की कमी की समस्या को बढ़ा दिया है।

आज ऐसी पहल की आवश्यकता है जो धरती पर जल को बचा सके और उसका भविष्य के लिए संरक्षण कर सके। विश्व के सभी देशों ने जल संरक्षण के लिए कदम उठाए हैं। भारत में भी जल के संसाधनों जैसे की नदियों, तालाबों, जलाशयों आदि को बचाया जा रहा है, उन्हें साफ किया जा रहा है। पानी का संग्रह किया जा रहा है ताकि आपने वाली पीढ़ी को हम जल संकट से बचा सकें।

जल संरक्षण के उपाय

जल संरक्षण के लिए हमें कई कदम उठाने की जरूरत है क्यूंकी किसी ना किसी रूप में हम पानी का दुरुपयोग कर रहे हैं और उसे बचाने और संग्रहीत करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं, जल संरक्षण के लिए हम निम्न कदम उठा सकते हैं:

  • जल संरक्षण में एक रणनीति वर्षा जल संचयन है। तालाबों, झीलों, नहरों का निर्माण करना, पानी के जलाशय का विस्तार करना वर्षा जल संचयन के विभिन्न तरीके हैं। इससे भूगर्भ जल भी बढ़ेगा और जल संचय भो होगा।
  • भूगर्भ जल के संरक्षण पर उचित कदम उठाने की जरूरत है।
  • घरों में पानी के मीटर लगाने की जरूरत है जिससे लोगों को पानी का महत्व समझ में आएगा और पानी का दुरुपयोग बंद होगा।
  • खेतों में सिंचाई के लिए टपक पद्धति और फुवारे का उपयोग करने से पानी को बचा सकते हैं।
  • घर में नहाने, बर्तन धोने, शौचालय आदि में ढेर सारा पानी इस्तेमाल किया जाता है अतः वहाँ हमें समझदारी से पानी का उपयोग करना चाहिए
  • वनों की कटाई के कारण वर्षा पर भी प्रभाव पड़ता है अतः वनों की कतयो रोककर उनका विस्तार बढ़ाना चाहिए

इस प्रकार के कई कदम हैं जो हम जल संरक्षण के लिए उठा सकते हैं। सबसे जरूरी है जागरूकता जिसका अभाव लोगों को जल का महत्व नहीं समझा पाता। अतः एक सामजिक जागरूकता भी जरूरी है।

जल संरक्षण पर विस्तृत निबंध (10 00 शब्द) 

धरती पर समस्त जीवन चक्र को बनाए रखने के लिए हवा, पानी और भोजन जरूरी है, किसी एक की कमी के बिना कोई भी जीवित नहीं रह सकता। जल को अमूल्य संपत्ति कहा जाता है और इसकी एक-एक बूंद हमारे लिए बहुत कीमती है। धरती पर वैसे तो जल का 70 प्रतिशत भाग है लेकिन हम उपयोग कर सकें उतना मात्र 1 प्रतिशत जल है। अतः हमें बड़ी सोच-समझ के साथ सीमित जल का उपयोग करना चाहिए।

जल संरक्षण क्या है?

जल संरक्षण, अनावश्यक रूप से पानी के उपयोग को कम करने के लिए कुशलतापूर्वक पानी का उपयोग करने का एक अभ्यास है। आज हमारे लिए जल संरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि ताजा स्वच्छ जल एक सीमित संसाधन है, साथ ही बहुमूल्य भी है। जल सभी के जीवन के पोषण के लिए एक आवश्यक संपत्ति है और स्थानीय उपयोग से लेकर कृषि और उद्योग के लिए उपयुक्त सभी गतिविधियों की मूलभूत मांग है। अतः इस प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है।

मानव आबादी के नियमित रूप से बढ्ने से जल संसाधनों पर गंभीर दवाब पैदा हो गया है। नदी, तालाब, झील, जलाशय और भूजल के दुरुपयोग से जल की भीषण कमी का सामना आज हमें करना पड़ रहा है और शायद आने वाले वर्षों में यह संकट और अधिक बढ़ने वाला है।

आज हमें पानी को बचाने की कोशिशों में तेजी लाने की आवश्यकता है और जल संरक्षण पर गंभीर विचार करने की जरूरत है।

क्यूँ जरूरी है जल संरक्षण

आबादी और उद्योग की वृद्धि के कारण ताजे जल स्रोतों की हमारी जरूरत बढ़ रही है, लेकिन हमारे पास जल का सीमित संग्रह बचा है। ऐसी हालत में जल संरक्षण ही एक मात्र उपाय है जो हमें और आने वाली पीढ़ी को जल के संकट से बचा सकता है।

पानी के संरक्षण में असफल होने से पानी की पर्याप्त आपूर्ति की कमी हो सकती है, जिसके कठोर परिणाम हो सकते हैं। इनमें पानी की लागत बढ़ना, कम खाद्य आपूर्ति, स्वास्थ्य संबंधी खतरे और राजनीतिक संघर्ष शामिल हैं।

जल की कमी के कारण पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ेगा और वन, उपवन, वन्य जीव आदि पर संकट आ सकता है, अतः जल संरक्षण जरूरी है।

जल पूरी जीवसृष्टि के लिए महत्वपूर्ण है और धरती पर इसका सीमित स्त्रोत हमें इस बात की ओर प्रेरित करता है की हम जल संरक्षण की ओर ध्यान दें, अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी को पीने के लिए एक बूंद जल के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा।

जल संरक्षण कैसे करे?

ऐसे बहुत से तरीके हैं जिनको अपनाकर हम जल का संरक्षण कर सकते हैं। यदि हम जल का सीमित उपयोग करें और उसे बचाने के लिए उचित कदम उठाएँ तो जल का सीमित भंडार लंबे समय तक बना रह सकता है।

वर्षा के पानी का संग्रह करना –  वर्षा के जल का संग्रह ना करना हमारी सबसे बड़ी भूल है। आज भी वर्षा का साफ पानी समुद्र, गटर, नालियों में बह जाता है और व्यर्थ हो जाता है। इस पानी का यदि हम संग्रह करें तो हर साल जो जल संकट हमें देखना पड़ता है उससे राहत मिल सकती है। बरसात के जल को हम नहर, तालाब, जलाशय, कुंड आदि बनाकर संग्रहीत कर सकते हैं। इस संग्रहीत किए जल का उपयोग हम घर के उपयोग, उद्योगों और कृषि कार्यों में कर सकते हैं। हम गावों, शहरों के आसपास तालाब बना सकते हैं, विशाल नहरों का निर्माण कर पानी के संकट वाले क्षेत्रों को राहत पहुंचा सकते हैं।

भूगर्भ जल का रक्षण – भूगर्भ जल अर्थात जमीन के अंदर स्थित जल जो की हम कुवों, हैंडपंप आदि से निकालते हैं। अधिक भूगर्भ जल निकालने के कारण और उसका दुरुपयोग होने के कारण भूगर्भ जल में भी कमी आती है। भूगर्भ जल का हमें रक्षण करना चाहिए। तालाब, जलाशय आदि बनाने से भूगर्भ जल का स्तर बढ़ता है। भूमि प्रदूषण भी रोकने की आवश्यकता है क्यूंकी उसके कारण भूगर्भ जल दूषित होता है।

दैनिक कार्यों में जल का सही उपयोग – सबसे अधिक पानी का उपयोग यदि कहीं किया जाता है तो वो है घरेलू कार्यों में। हम अपने रोजिंदा जीवन में बड़ी मात्रा में पानी का दुरुपयोग करते हैं, क्यूंकी हम इस बात से अंजान होते हैं की यह जल सीमित मात्रा में ही धरती पर उपलब्ध है।

नहाने में, कपड़े व बर्तन धोने में, वाहनों को धोने के लिए, त्योहारों के समय, घर की साफ-सफाई के समय आदि ऐसे बहुत से कार्य हैं जिनमें हम पानी को बर्बाद करते हैं। यदि हम अपनी जवाबदारी को समझकर पानी का सदुपयोग करें तो काफी हद तक जल संरक्षण में अपना योगदान हम दे सकते हैं।

  • हमेशा नल को कसकर बंद करें ताकि उनमें से पानी ना बर्बाद हो।
  • अपने नल के अंदर और आसपास किसी भी लीक की तुरंत मरम्मत करें। (एक रिसाव से प्रति वर्ष कई हजार लीटर पानी बर्बाद हो सकता है।)
  • अपने पानी के उपयोग को कम करने के लिए अपने नल पर एक जलवाहक या पानी के प्रवाह को कम करने वाले लगाव का उपयोग करें।
  • बर्तन धोते समय कभी भी लगातार पानी न चलाएं।
  • ब्रश करते समय, जब आप वास्तव में ब्रश कर रहे हों तो पानी बंद कर दें। (यह सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले पानी का लगभग 80% बचाता है।)
  • लो-फ्लश शौचालय स्थापित करके आप पानी के उपयोग को 40% से 50% तक कम कर सकते हैं
  • लॉन और उद्यानों को गर्म मौसम के दौरान प्रतिदिन केवल 5 मिलीमीटर पानी की आवश्यकता होती है। वसंत, पतझड़ या शांत मौसम के दौरान कम पानी की आवश्यकता होती है अतः उस समय पानी कम इस्तेमाल करें।
  • घरों में पानी के मीटर लगाने से हम इस पानी के दुरुपयोग को रोक सकते हैं।

26 Comments

जल शक्ति अभियान पर निबन्ध बताओ

Ager hm water nhi save krenge to really aisa time ayega ki hm log ya hmari ane vali genration ko water milega nhi hoga

ji ha roli ji yesha possible ha

Hame rai dene se nahi hoga hame kuchh karna chahiye

Agar hum water ko save nahi kare to aaisa hi hoga

Nice nibandh

????thank you

जल क्या है इस पर परी जानकारी का एक आर्टिकल है आप अपने ब्लॉग में मेंशन कीजिए ना प्लीज प्लीज

Save water Save life

I am Anvesha. I am a student studying in class VI and I needed a 200 words essay on water conservation in Hindi. Thanks for the help.

Save Save Save water we can help to save the life

very gud info …. jal hi jivan hei …

Thanks sir/ma,am

Very good essay, that too in Hindi language

Thanks 👍 it’s very good essay

Ohhhhhh……….. Nooooooo…………. This eassy is good but………………..👍 I don’t like to complete projects………..😔 But thanks ….☺️

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  • Essays in Hindi /

Water Conservation Essay in Hindi : ऐसे लिखें जल संरक्षण पर निबंध

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  • Updated on  
  • जून 25, 2024

जल संरक्षण पर निबंध

जल संरक्षण के महत्व को समझने से छात्रों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में मदद मिलती है। वे जल संसाधनों की सीमित प्रकृति और जल की गुणवत्ता और उपलब्धता पर मानवीय गतिविधियों के प्रभाव के बारे में सीखते हैं। छात्रों को जल संरक्षण के बारे में पढ़ाने से उन्हें शुरू से ही स्थायी आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वे पानी का कुशलतापूर्वक और जिम्मेदारी से उपयोग करना सीखते हैं, जो पानी की बर्बादी को कम करने और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने में योगदान देता है। इसलिए इस ब्लाॅग में हम स्टूडेंट्स के लिए जल संरक्षण पर निबंध (Water Conservation Essay in Hindi) दे रहे हैं जिससे आपको जल संरक्षण का महत्व समझ आएगा।

This Blog Includes:

जल संरक्षण पर 100 शब्दों में निबंध, जल संरक्षण पर 200 शब्दों में निबंध, वर्तमान में पानी की कमी- एक गंभीर मुद्दा, जल संरक्षण का क्या महत्व है, जल संरक्षण पर 10 लाइन्स .

100 शब्दों में Water Conservation Essay in Hindi नीचे दिया गया है:

हर चीज़ के लिए पानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम इसका उपयोग घर में खाना पकाने, नहाने, पीने और सफाई जैसे कई कामों के लिए करते हैं। पानी हमारे जीवन का सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण घटक है। जब हमें प्यास लगती है, तो हम पानी पीते हैं, कपड़े धोते हैं, नहाते हैं और पानी से खाना बनाते हैं। भले ही हम कई कामों के लिए पानी पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं, लेकिन हममें से ज़्यादातर लोगों को इसे पाने में कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन ऐसा हर किसी के साथ नहीं होता। समाज के कुछ तबके पानी की कमी का सामना करते हैं और वे पानी के बिना अपनी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पाते। जल संरक्षण और इसके महत्व को समझने के लिए हम हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाते हैं।

200 शब्दों में Water Conservation Essay in Hindi इस प्रकार है:

पानी पृथ्वी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सभी के लिए पर्याप्त नहीं है। 2022 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 2 अरब लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिलता है। इससे उनके बीमार पड़ने की संभावना अधिक हो जाती है। जलवायु परिवर्तन बार-बार बाढ़ और सूखे का कारण बनकर हालात को बदतर बना रहा है, इसलिए हमें वास्तव में पानी बचाने की जरूरत है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी के लिए पर्याप्त पानी हो, पानी बचाना महत्वपूर्ण है।

हम खेती, कारखानों और घरों के लिए बहुत सारा पानी उपयोग करते हैं। पानी बचाकर, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि चारों ओर घूमने के लिए बहुत कुछ है और इसके लिए झगड़ों से बचा जा सकता है। पानी बचाने से प्रकृति को संतुलित रहने में भी मदद मिलती है क्योंकि हर चीज़ को जीने के लिए पानी की ज़रूरत होती है। कम पानी का उपयोग करने का मतलब इसे हम तक पहुंचाने के लिए कम ऊर्जा का उपयोग करना भी है।

ऐसे कई तरीके हैं जिनसे हम पानी बचा सकते हैं, जैसे वर्षा जल एकत्र करना, पानी बचाने वाले उपकरणों का उपयोग करना और पानी बर्बाद न करना। यदि हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अभी और भविष्य में सभी के लिए पर्याप्त पानी हो, तो हमें आज से ही पानी बचाना शुरू करना होगा।

Water Conservation Essay in Hindi (1)

जल संरक्षण पर 500 शब्दों में निबंध

500 शब्दों में Water Conservation Essay in Hindi इस प्रकार है:

जल संरक्षण आज की दुनिया में पर्यावरण प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण पहलू है। हमारा ग्रह पानी की कमी और प्रदूषण से संबंधित बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए व्यक्तियों, समुदायों और राष्ट्रों के लिए इस बहुमूल्य संसाधन के संरक्षण को प्राथमिकता देना अनिवार्य हो गया है। घरों से लेकर औद्योगिक संचालन तक, वर्तमान और भावी पीढ़ियों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए पानी का सतत उपयोग आवश्यक है।

दुनिया भर में पानी की कमी एक बड़ी समस्या है, जब हर किसी के लिए पर्याप्त ताज़ा पानी उपलब्ध नहीं होता है। ऐसा तब होता है जब पानी की मांग उपलब्ध मात्रा से अधिक होती है। यह अलग-अलग तरीकों से दिखाई देता है, जैसे पीने के लिए साफ पानी न होना, खेती या कारखानों के लिए पर्याप्त पानी न होना और नदियों और झीलों का सूखना।

पानी की कमी होने के कई कारण हैं:

  • ग्लोबल वार्मिंग: यह चीजों को गर्म बना रहा है और पानी को बिगाड़ रहा है।
  • खराब जल प्रबंधन: कभी-कभी, लोग पानी का बुद्धिमानी से उपयोग नहीं करते हैं या बाद के लिए पर्याप्त बचत नहीं करते हैं।
  • जल प्रदूषण: गंदा पानी पीने या अन्य चीजों के लिए उपयोग करने के लिए सुरक्षित नहीं है।
  • बहुत अधिक मांग: हम अपने हर काम में अधिक पानी का उपयोग कर रहे हैं।
  • बाढ़: बहुत अधिक पानी भी एक समस्या हो सकता है, खासकर अगर यह फसलों या इमारतों को बहा ले जाए।
  • सूखा: पर्याप्त बारिश नहीं होने का मतलब पौधों, जानवरों और लोगों के लिए पर्याप्त पानी नहीं है।
  • खराब कृषि तकनीकें: कभी-कभी, किसान बहुत अधिक पानी का उपयोग करते हैं या इसका सही तरीके से उपयोग नहीं करते हैं।
  • पानी की बर्बादी: कभी-कभी, हम अपनी ज़रूरत से ज़्यादा पानी का उपयोग कर लेते हैं।

ये सभी चीजें मिलकर हर किसी के लिए पर्याप्त पानी प्राप्त करना वास्तव में कठिन बना सकती हैं, इसलिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि पानी का बेहतर उपयोग कैसे किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी के लिए पर्याप्त पानी हो।

पानी की कमी से निपटने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि अभी और भविष्य में सभी के लिए पर्याप्त पानी हो, पानी बचाना बेहद महत्वपूर्ण है। यहां तक कि आपके द्वारा किए जाने वाले छोटे-छोटे काम भी मदद कर सकते हैं, जैसे जब आप नल का उपयोग नहीं कर रहे हों तो उसे बंद कर देना। यहां कुछ अन्य तरीके दिए गए हैं जिनसे हम पानी बचा सकते हैं:

  • ड्रिप सिंचाई: यह तकनीक पानी को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाने में मदद करती है, जिससे बर्बादी कम होती है।
  • मृदा प्रबंधन: अच्छी मृदा पद्धतियाँ पानी को बनाए रखने और इसे पौधों के उपयोग के लिए उपलब्ध रखने में मदद करती हैं।
  • सूखा-सहिष्णु फसलें: कम पानी में जीवित रहने वाली फसलें लगाने से कृषि में पानी बचाने में मदद मिलती है।
  • मल्चिंग: मिट्टी में गीली घास की एक परत डालने से नमी बनाए रखने और वाष्पीकरण को कम करने में मदद मिलती है।
  • पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग: बगीचों में पानी देने या शौचालय में फ्लश करने जैसी चीजों के लिए उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग करने से ताजे पानी को बचाने में मदद मिलती है।
  • वर्षा जल संचयन: छतों से वर्षा जल एकत्र करना और बाद में उपयोग के लिए इसे संग्रहीत करना पानी बचाने का एक शानदार तरीका है।
  • अलवणीकरण: समुद्री जल को मीठे पानी में बदलने से तटीय क्षेत्रों में जल आपूर्ति को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
  • जागरूकता फैलाना: पानी बचाना क्यों महत्वपूर्ण है, इस बारे में दूसरों से बात करना अधिक लोगों को अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
  • जल सफाई अभियानों का समर्थन करना: प्रदूषित जल स्रोतों को साफ करने के अभियानों में दान देना या उनमें भाग लेना यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि हमारे पास उपयोग करने के लिए साफ पानी है।
  • उचित जल प्रबंधन: कृषि से लेकर उद्योग और घरों तक जीवन के सभी पहलुओं में पानी का बुद्धिमानी और कुशलता से उपयोग करने से इस बहुमूल्य संसाधन के संरक्षण में मदद मिलती है।

ये कदम उठाकर और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करके, हम सभी पानी के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में भूमिका निभा सकते हैं।

जल संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं है बल्कि हमारे ग्रह और इसके निवासियों की भलाई के लिए एक आवश्यकता है। अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलावों को लागू करके और बड़ी पहलों का समर्थन करके, हम सामूहिक रूप से अपने जल संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। जिम्मेदार लोगों के रूप में, हमें जल की कमी के मुद्दे के बारे में जागरूक होना चाहिए और अपने बच्चों को पाइपों और नलों में लीक को ठीक करके, उपयोग न होने पर नल को बंद करके और कम समय तक स्नान करके जल संरक्षण करना सिखाना चाहिए।

Water Conservation Essay in Hindi पर 10 लाइन्स इस प्रकार हैंः

  • वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए मीठे पानी की स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जल संरक्षण आवश्यक है।
  • जल संरक्षण से जल की कमी को कम करने में मदद मिलती है, जो लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली एक गंभीर वैश्विक समस्या है।
  • घर पर जल-बचत अभियान को लागू करना, जैसे जल-कुशल उपकरणों का उपयोग करना, पानी की बर्बादी को काफी कम कर सकता है।
  • कृषि, उद्योग और घर सभी जिम्मेदार जल उपयोग और प्रबंधन के माध्यम से जल संरक्षण में भूमिका निभाते हैं।
  • वर्षा जल संचयन, बाद में उपयोग के लिए वर्षा जल को एकत्रित और संग्रहीत करके जल संरक्षण का एक सरल लेकिन प्रभावी तरीका है।
  • कृषि में ड्रिप सिंचाई तकनीक सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचाकर पानी की बर्बादी को कम करती है।
  • जल संरक्षण के महत्व के बारे में जन जागरूकता अभियान व्यक्तियों को जल-बचत की आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
  • बागवानी या सफाई जैसे गैर-पीने योग्य उद्देश्यों के लिए पानी का पुन: उपयोग करने से पानी की खपत कम हो सकती है।
  • उद्योगों में जल-कुशल प्रौद्योगिकियों और बुनियादी ढांचे को लागू करने से पानी के उपयोग को कम करने और दक्षता को अधिकतम करने में मदद मिल सकती है।
  • इस बहुमूल्य संसाधन की सुरक्षा के लिए प्रभावी जल संरक्षण रणनीतियों को विकसित करने और लागू करने में सरकारों, समुदायों और व्यवसायों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है।

संबंधित ब्लाॅग्स 

जल संरक्षण से तात्पर्य अपशिष्ट को कम करने और वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के लिए मीठे पानी की स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पानी का बुद्धिमानीपूर्वक और कुशलता से उपयोग करने के अभ्यास से है।

जल संरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पानी की कमी को कम करने, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने और सभी के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद करता है। यह जल उपचार और वितरण से जुड़ी ऊर्जा खपत को भी कम करता है।

आप लीकेज को ठीक करके, छोटे शॉवर लेकर, उपयोग में न होने पर नल बंद करके, जल-कुशल उपकरणों का उपयोग करके, बाहरी उपयोग के लिए वर्षा जल एकत्र करके, और पौधों को पानी देने या शौचालयों को फ्लश करने जैसे गैर-पीने योग्य उद्देश्यों के लिए गंदे पानी का पुन: उपयोग करके घर पर पानी का संरक्षण कर सकते हैं।

उम्मीद है कि आपको Water Conservation Essay in Hindi के संदर्भ में हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। निबंध लेखन के अन्य ब्लॉग्स पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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जल संसाधन संरक्षण और विकास | Water Resources Conservation in Hindi

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जल एक बहुमूल्य संसाधन है। यह कहीं विकास का तो कहीं विनाश का कारक बनता है। जनसंख्या वृद्धि एवं भावी आवश्यकता को देखते हुए जल के एक-एक बूँद की उपयोगिता बढ़ गयी है। अत: जनसंख्या दबाव तथा आवश्यकतानुसार जल संसाधन का उचित उपयोग करने का योजनानुसार लक्ष्य रखा गया है। जल संरक्षण एवं विकास वर्षा की बूँद का पृथ्वी पर गिरने के साथ ही करना चाहिए। इस हेतु नदी मार्गों पर बांधों एवं जलाशयों का निर्माण करना होगा ताकि भविष्य में हमें पीने को शुद्ध पेयजल, सिंचाई, मत्स्यपालन एवं औद्योगिक कार्यों हेतु जल उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही बाढ़ों से मुक्ति मिल सके एवं कम वर्षा, नीचे जल स्तर, सूखा ग्रस्त एवं अकालग्रस्त क्षेत्रों में नहरों आदि में जल की पूर्ति हो सके।

जल संसाधन की वर्तमान समस्याएँ :

जल का प्रधान एवं महत्त्वपूर्ण स्रोत मानसूनी वर्षा है। ऊपरी महानदी बेसिन में मानसूनी से वर्षा होती है। इस कारण वर्षा की अनियमितता, अनिश्चितता एवं असमान वितरण पाई जाती है। इस असमानता को दूर करने के लिये बेसिन में जल संसाधन संरक्षण की आवश्यकता है।

जल संरक्षण :

जल एक प्राकृतिक उपहार है, जिसका विवेकपूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए। ऊपरी महानदी बेसिन में जल का मुख्य स्रोत सतही एवं भूमिगत जल है। सतही जल में नदियाँ, नहरें एवं जलाशय है जबकि भूमिगत जल में कुआँ एवं नलकूप प्रमुख है। इन जल संग्राहकों से जल संग्रह कर 96.99 प्रतिशत भाग में सिंचाई किया जाता है एवं शेष 3.01 प्रतिशत जल का उपयोग औद्योगिक एवं अन्य कार्यों हेतु होता है। बेसिन में सतही जल का 1,41,165 लाख घन मीटर एवं भूमिगत जल का 11,134 लाख घनमीटर उपयोग हो रहा है। यहाँ वर्षा का औसत 1061 मिलीमीटर है एवं कुछ फसली क्षेत्र का प्रतिशत 60.12 है। निरा फसल क्षेत्र गहनता 30.94 प्रतिशत है। इस अवसर पर जल का अधिकतम उपयोग हो रहा है। पीने के लिये शहरों में 70 लीटर एवं ग्रामों में 40 लीटर प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन जल उपलब्ध हो रहा है। औद्योगिक कार्यों में भी बहुतायात से जल का उपयोग हो रहा है जिससे भावी पीढ़ी के लिये जल की गंभीर समस्या बनी हुई है। अत: जल संसाधन विकास के लिये जल संरक्षण एवं प्रबंधन करना अति आवश्यक है।

जल संरक्षण की समस्याएँ :

ऊपरी महानदी बेसिन में जल संसाधन की प्रचुरता है लेकिन जल का विवेकपूर्ण उपयोग न होने के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है। अत: जल संसाधन संबंधी समस्या उत्पन्न हो गई है। प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं - 1. जल की कमी 2. भूमिगत जल संसाधन का अति विदोहन 3. धरातलीय जल का उचित प्रयोग न कर पाना 4. निरंतर कृषि भूमि का विस्तार 5. शहरीकरण एवं उद्योगीकरण 6. जल का अनावश्यक उपयोग 7. वर्षा के पानी 8. जलाशयों एवं जल संग्रह क्षेत्रों की कमी, एवं 9. जलशोधन संयंत्रों की कमी।

जल संरक्षण के उपाय :

ऊपरी महानदी बेसिन ग्राम प्रधान होने के कारण कृषि का विस्तार हुआ है, साथ ही यहाँ औद्योगीकरण के कारण नगरों का भी विकास तीव्रता से हो रहा है। बेसिन में जनसंख्या एवं औद्योगीकरण के दबाव से जलीय समस्या हो गई है इसे उपलब्ध भूमिगत जल एवं धरातलीय जलस्रोतों के आधार पर दूर किया जा रहा है। प्रदूषित जल को शोधन संयंत्र द्वारा शुद्ध कर सिंचाई हेतु प्रयोग में लाना, पक्के जलाशयों, तालाबों एवं सिंचाई नहरों का निर्माण, जल की अनावश्यक बर्बादी को रोकना, वैकल्पिक साधन जैसे भूमिगत जल का पुन: पूर्ति करना, जल के अनियंत्रित प्रवाह को रोकना एवं जल का वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग करना आदि जल संरक्षण भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए किया जा रहा है।

जल संसाधन का विकास :

ऊपरी महानदी बेसिन - धरातलीय एवं भूमिगत जल उपयोग

जल प्रदूषण :

मानव क्रियाकलाप से उत्पन्न कचरे या अतिरिक्त ऊर्जा के द्वारा पर्यावरण के भौमिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों में आने वाले हानिकारक परिवर्तन को प्रदूषण कहते हैं। जल में प्राकृतिक या मानव जन्य कारणों से जल की गुणवत्ता में आने वाले परिवर्तन जल प्रदूषण कहते हैं (माउथविक एवं विवियर 1965, 10)। ऊपरी महानदी बेसिन में जल प्रदूषण जैविक एवं अजैविक क्रियाओं जैसे कुड़ा-करकट, नगरीय एवं औद्योगिक मलवा, अपशिष्ट घातक रासायनिक एवं आणविक सक्रिय पदार्थों के फेंकने आदि से हुआ है। प्रदूषित जल में मिलने वाले कीटाणु व विषाणु जीवों में विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ फैलाती हैं। बेसिन में मनुष्य कृषि का विकास एवं भोज्य प्राप्ति के लिये भूमि को कृत्रिम खाद, कीटनाशक दवाइयाँ (डी.डी.टी, एल्ड्रीन, एंडोसल्फान आदि) जैविक खाद एवं नगरों को प्रदूषित जल देता रहा है जिससे सिंचित जल के माध्यम से यह प्रदूषण खाद्य पदार्थों के रूप में भोजन में मिलता है। पीने के पानी में प्रदूषित जल का मिश्रण हो जाता है इससे हैजा, टाइफाइड, पेचिस एवं अतिसार आदि बीमारियाँ जन्म लेती है। जल प्रदूषण नियंत्रण 1974 के अनुसार जल प्रदूषण की रोकथाम व नियंत्रण के लिये एक समिति बनाई गई है जिसका उद्देश्य जल की गुणवत्ता को बनाये रखना है। इसमें जल एवं वनस्पति का संरक्षण, भूमिगत जल रिसाव व अन्य रासायनिक मिश्रणों के आधार पर नियंत्रण किया जाता है। ऊपरी महानदी बेसिन में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगाँव व रायगढ़ जिले में औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट पदार्थ नदियों के प्रवाह मार्ग के दोनों किनारें फेंक दिये जाते हैं। जिससे नदी-नालों एवं कुओं का पानी रंगीन एवं अम्लीय हो जाता है। पानी में क्लोराइड की मात्रा बढ़ने लगती है। महानदी के तट के निकट स्थित क्षेत्रों के पानी का कठोरता परीक्षण किया गया जिससे वहाँ के मिट्टी में क्षारीयता व अम्लीयता तत्व पाई गई है रायगढ़ में जूट साफ करने के लिये पानी का उपयोग किया जात है। जिससे जल प्रदूषित होती है। कोरबा स्थित ताप-विद्युत संयंत्र, भिलाई लौह इस्पात संयंत्र, जामुल, मांढर व बैकुण्ठ सीमेंट संयंत्र कुम्हारी डिस्टलरी गैस व उर्वरक कारखाना, रायपुर में प्लास्टिक व कांच उद्योग, पत्थर तोड़ने के कारखाने आदि औद्योगिक अवशिष्टों से जल प्रदूषित हो रहा है। इस ओर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिये नियोजित तरीके से उद्योगों का नगरों का विकास कर मास्टर प्लान के आधार पर विकास किये जाने चाहिए।

जल प्रबंधन :

जल प्रकृति प्रदत्त असीमित भंडार है, इसलिये इसका दुरुपयोग अधिक किया जाता है। अत: जल की पर्याप्तता एवं शुद्धता बनाये रखने के लिये जल का उचित प्रबंधन आवश्यक है। जल संसाधन और उसके प्रबंधन के लिये जल की उपयोगिता को समझकर उपयोग करना चाहिए।

ऊपरी महानदी बेसिन में जल प्राप्ति के दो प्रमुख साधन हैं -

1. सतही जल - तालाब, नदी नाले एवं जलाशय 2. भूमिगत जल - कुआँ एवं नलकूप। इन स्रोतों से प्राप्त जल का उपयोग पीने के लिये, औद्योगिक, सिंचाई मत्स्यपालन, नौपरिवहन एवं अन्य कार्यों के लिये किया जाता है। बेसिन में 11,134 लाख घन मीटर भूमिगत जल एवं 1,41,165 लाख घनमीटर धरातलीय जल है। कुल जल उपलब्धता, 1,52,299 लाख घन मीटर है। वर्तमान में भूमिगत जलस्तर वर्षा की कमी एवं चट्टानी संरंध्रता के कारण कम हो जाता है। इसके लिये उपलब्ध जल का उचित उपयोग नदियों के प्रवाह मार्ग में जल रोककर वर्षाजल को ढालों की तीव्रता के अनुसार बांध बनाकर एवं जलाशयों का निर्माण कर किया जा रहा है। ऊपरी महानदी बेसिन में कुछ औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट पदार्थ, गंदा पानी को उपचारित किये बिना ही नदियों व खुली जगहों पर प्रवाहित कर देते हैं। इससे जमीन पर प्रवाहित होने वाला गंदा जल अपनी अम्लीयता के कारण शीघ्रता से मिट्टी में रिसता है और भूमिगत जलस्रोतों कुओं, नलकूपों आदि के पानी को जहरीला बना देता है। अत: ऐसे औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषित वर्षाजल के संपर्क में आने से प्राणहीन हो जाती है। जिसका प्रयोग कृषि कार्य के लिये किया जा सकता है। बेसिन में 1200 से 1600 मिली मीटर तक वर्षा होती है। इसका औसत 1400 मिली मीटर है। यह वर्षा उचित प्रबंधन के अभाव में बेकार हो जाता है। अत: मानव आवश्यकताओं एवं जल की कमी, भूमिगत जलस्तर में ह्रास आदि को ध्यान में रखते हुए जल का विविध प्रबंधन करना चाहिए। ऊपरी महानदी बेसिन में घरेलू कार्य, औद्योगिक एवं सिंचाई आदि के लिये भूगर्भिक जल का संवर्धन करना होगा। बेसिन वार्षिक वर्षा की मात्रा एवं वितरण के अनुसार भू-गर्भिक जल निकासी एवं भू-गर्भ जल पुनर्भरण के लिये वर्षाजल को प्रबंधन में करना होगा। समय-समय पर बेसिन के कुछ भागों के जल का अध्ययन केंद्रीय भूमिगत जल बोर्ड, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम राज्य शासन की सहायता से कृत्रिम पुनर्भरण पर भू-जल समाधान मूल्यांकन परियोजनाओं के माध्यम से किया गया है। अत: बेसिन में भूमिगत जल में अभिवृद्धि के लिये वृक्षारोपण, मृदा में प्राकृतिक तत्वों की वृद्धि, जल प्रदूषण स्तर निवारण, जल प्रवाह को नियंत्रण, जल संग्रहकों की स्थापना, बाढ़ नियंत्रण एवं जल का उचित प्रबंधन कर जल संसाधन का मूल्यांकन एवं विकास का प्रयास किया गया है।

ऊपरी महानदी बेसिन में जल संसाधन मूल्यांकन एवं विकास, शोध-प्रबंध 1999

 

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short essay on jal sanrakshan in hindi

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जल के जीवन मे महत्व जल संरक्षण पर निबंध

Water conservation essay in hindi, जल संरक्षण पर निबंध.

Water Conservation Essay – जल संरक्षण का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है, जैसा की हर कोई जानता है की जल ही जीवन है, ऐसे में जल की उपयोगिता को देखते हुए जल संरक्षण का महत्व काफी बढ़ जाता है,

तो चलिए इस पोस्ट के जरिये जल संरक्षण के निबन्ध पर प्रकाश डालेगे, जिसे आप भी अपने स्कूल में इस जल संरक्षण पर निबन्ध, Water Conservation Essay, Jal Sanrakshan Nibandh को क्लास 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 के विद्यार्थी हो तो, अपने विद्यालय में लिख सकते है, तो चलिए इस जल संरक्षण पर निबंध को जानते है.

जल संरक्षण पर हिंदी निबंध

Jal sanrakshan nibandh water conservation essay in hindi.

जीवन जीने के लिए जल बहुत ही आवश्यक है, ऐसे में जरा सोचिये जिन स्थानों पर जल नही मिलता है, जल की मात्रा की कमी है, उन स्थानों पर लोग जल के बिना कैसे जीवन यापन करते होंगे, ऐसे में हम सभी का कर्तव्य है की हमे जल को बर्बाद होने से बचाना चाहिए,

Table of Contents :-

जैसा की कहा भी गया है की बूंद बूंद से घड़ा भरता है, तो सोचिये लोग एक एक बूंद के जल को दुरूपयोग होने से बचाते है, तो इस संरक्षित जल का उपयोग उन स्थानों पर भी उपयोग किया जा सकता है, जहा पर पहले से ही जल की भारी मात्रा में कमी है.

और ऐसे में हम सभी यदि भविष्य के जीवन को सुरक्षित बनाना है, तो हमे जल संरक्षण पर बहुत ही अच्छे तरीके से ध्यान देना होगा, वरना वो दिन दूर नही जब लोग पानी के लिए एक दुसरे से लड़ाई करते फिरेगे,

वैसे तो हमारी धरती पर तीन चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है, लेकिन ये जा अधिकांश भाग महासागरो का पानी है, जो की बिलकुल खारा पानी है, पानी में अत्यधिक नमक की मात्रा होने के कारण इस जल का उपयोग पीने में नही किया जा पाता है. और इस तीन चौथाई का सिर्फ 3% भाग पानी ही पीने योग्य है, जो की वर्षा के जल से प्राप्त होता है, और हर वर्ष बरसात होने के बाद ये पीने योग्य पानी नदियों की सहायता से महासागरो में मिल जाते है. और वर्षा का कुछ जल धरती के अंदर में भाग में सोख लिए जाते है.

ऐसे में ये जो वर्षा का जल है यदि इन्हें बड़े बड़े जलाशयों में संरक्षित कर लिया जाय, तो यही जल हमारे पीने के काम आ सकते है, जिस कारण से जल संरक्षण पर सरकारों, नगर निकायों औरविभिन्न संस्थानों द्वारा काफी जोर दिया जाता है.

इस तरह से यदि हम पीने वाले जल को नुकसान होने से बचा सकते है तो निश्चित ही जल संरक्षण को आगे बढ़ा सकते है, इसलिए हमे जहा जितनी जरूरत हो, उतने ही जल का उपयोग करना चाहिए, और जो जल हमे मिलता है उसका जब जरूरत न हो तो उन्हें बेकार में बहने से रोकना चाहिए.

इस धरती पर जीवन का सबसे बड़ा स्रोत्र जल ही है, जल से ही पेड़ पौधे, नदियों तालाबो, जीव जन्तुओ और इंसानों का अस्तित्व है, ऐसे में जीवन की शुरुआत ही जल से होती है, इसलिए हमे जहा जितनी जरूरत हो उतना ही जल का उपयोग करना चाहिए, बाकी के जल को आगे के लिए बचाकर रखना चाहिए, तभी हम सभी जल की उपयोगिता को देखते हुए जल संरक्षण के लिए कार्य कर सकते है.

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जल संरक्षण पर निबंध

Essay on Water conservation in Hindi: जल हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है, इसके बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। जल के बिना यह प्रकृति, जीव-जन्तु, पेड़-पौधे सब अधूरे है। जल को बचाना हमारा कर्तव्य है।

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जल संरक्षण पर निबंध (Water Conservation Essay in Hindi)

हम यहां पर जल संरक्षण पर निबंध हिंदी में (Essay on Water conservation in Hindi) शेयर कर रहे है। इस निबंध में आपको जल संरक्षण से सम्बंधित सभी जानकारी प्राप्त होगी।

यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है। यहाँ पर हम 100, 150, 250, 400, 500, 600 और 800 शब्दों में जल संरक्षण पर निबंध (jal sanrakshan par nibandh) शेयर कर रहे है।

जल संरक्षण पर निबंध 100 शब्दों में

जल सभी के लिए बहुत ही जरूरी होता है, जल के बिना हम सभी का जीवन संभव नहीं है क्योंकि जल ही जीवन है। हमें जल को बर्बाद नहीं करना चाहिए बल्कि उसको बचाना चाहिए। ऐसा करके हम जल संरक्षण में मदद कर सकते हैं।

ऐसा करने के लिए हमें नीचे दिए गए इस एप्स को फॉलो करना होगा, जो निम्न है:

  • अपने घर की पानी टंकी को खुला ना छोड़े।
  • यदि टंकी कहीं से लिंक हो रही है तो उसे बनवा लें या टंकी को बदल दें।
  • व्यर्थ रूप से पानी की बर्बादी को पूरी तरह से रोकना चाहिए जैसे यदि कोई काम एक बाल्टी से हो रहा है तो उसकी अधिक बाल्टी पानी लेने से बचें।
  • कपड़े धोते समय पानी की टंकी को खुला न छोड़ें। जरूरत के हिसाब से ही पानी उपयोग करें।

जल संरक्षण पर निबंध 150 शब्दों में

पृथ्वी पर जीवन बनाएं रखने के लिए मनुष्यों, प्राणियों और पेड़ों के लिए हवा और पानी एक महत्वपूर्ण आधार है। पीने से लेकर कपड़े धोने तक, खाना पकाने से लेकर कई काम करने तक, पानी बहुत जरूरी है। लेकिन आज दुनिया में बहुत से ऐसे देश हैं जो गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं।

जल संकट की इस गंभीर समस्या को हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए और हमें जल सरंक्षण के महत्व को समझना चाहिए। हमें जितनी जल्दी हो सके पानी बचाना चाहिए।

हमें जल संरक्षण के लिए भी कुछ पर्याप्त उपाय करने चाहिए। सभी जल रिसावों को ठीक करना चाहिए। हमें किसी भी हालत में जल को प्रदूषित नहीं करना चाहिए।

पानी बचाने के महत्व को बच्चों के दिमाग में सिखाया और पैदा किया जाना चाहिए ताकि वे बड़े होकर समझदारी से और लगातार जल संरक्षण के लिए प्रयास करें।

यदि हर कोई इतना कीमती पानी दैनिक आधार पर बर्बाद कर देगा तो आखिरकार, एक दिन ग्रह पर सभी के लिए जल संसाधनों की कमी पैदा हो जाएगी। पानी के बिना सब कुछ व्यर्थ है और इसलिए हमें स्थानीय पहल से पानी बचाना शुरू करना चाहिए।

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जल संरक्षण पर निबंध 250 शब्दों में

पृथ्वी के सभी जीवों के लिए जल एक अमृत समान है। जल एक प्राकृतिक अमूल्य संपत्ति है। बिना जल के जीवन असंभव है। जल का व्यर्थ उपयोग हमारे जीवन को संकट में डाल सकता है क्योंकि पृथ्वी पर का सिर्फ 1% पानी ही हमारे लिए उपयोगी है।

बढ़ती जन संख्या और औद्योगिकरण के कारण दुनिया के सभी देशों पर जल संकट की विपदा आ पड़ी है। वर्तमान समय में हमारे आने वाले भविष्य के लिए जल संरक्षण करना बेहद आवश्यक हो गया है।

पानी का व्यर्थ उपयोग ना करना और पानी हो दूषित होने से बचाना, उसे जल संरक्षण कहते है। पानी हमारे जीवन के हर क्षेत्र में जरुरी है। दैनिक कार्य से लेकर, कृषि, कारखाने तक हर जगह पर पानी की आवश्यकता पड़ती है।

लेकिन आज पेड़ों की हो रही अंधाधुन कटाई की वजह और ग्लोबल वार्मिंग के कारण से वर्षा चक्र का संतुलन बिगड़ गया है। जिसके कारण दुनिया के कई देशों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

इसलिए हमें आज लोगों के प्रति जल संरक्षण के बारे में जागरूकता लाने का प्रयास करना चाहिए। जल संरक्षण के उपाय के लिए हमें सबसे पहले वर्षा के जल का संग्रह करना होगा, इसलिए देश में ज्यादा से ज्यादा वर्षा जल संचयन के प्रोजेक्ट शुरू करने होंगे।

दैनिक कार्यों में पानी का उपयोग कम करना होगा। विज्ञान की मदद लेकर सागर के खारे पानी को मीठे पानी में बदलकर उसका उपयोग करना होगा। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने होंगे।

हमें जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। जल का मूल्य समझकर उनका व्यर्थ उपयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि जल से ही जीवन है।

  • जल पर निबंध
  • वर्षा जल संचयन पर निबंध

जल संरक्षण पर निबंध 400 शब्दों में

जल संरक्षण का मतलब होता है कि पीने योग्य पानी का संरक्षण करना ही नहीं बल्कि जल संरक्षण का अर्थ होता है कि वर्षा के जल का भी संरक्षण करना, जल की समस्या के बढ़ने का कारण जलवायु का परिवर्तन होना भी है, जलवायु परिवर्तन होने के कारण से जल की समस्या उत्पन्न हो जाती है, विश्व के लगभग सभी देशों ने जल संरक्षण के लिए अनेकों कार्य किये है।

ऐसे में भारत सरकार भी जल संरक्षण के लिए अनेकों स्थानों पर तालाब, पोखरी तथा नहरों आदि का निर्माण करा रही है, जिससे कि जल संरक्षण में काफी मात्रा में मदद मिल सके।

इस प्रकार हमारे जीवन के लिए भोजन हवा की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार जल की व्यवस्था होती है। इसके बिना जीवन संभव नहीं है तथा सभी जीव जंतु जल के बिना नहीं रह सकते हैं।

जल हमारे जीवन की लगभग सभी कार्य में काम आता है जैसे कि भोजन बनाने में, स्नान करने में, कपड़ों को धोने में, सबसे बड़ा उपयोग जल को पीने में ऐसे में आप तो समझ ही गए होंगे कि जल हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है। ऐसे में आपको जल को व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

आप को जितना हो सके, उतना जल को बचाना चाहिए। हम आपको बता दें कि धरती पर जल तो बहुत मात्रा में उपस्थित है। परंतु पीने योग्य जल केवल 1 प्रतिशत जल है बाकी के अन्य जल खारे हैं या तो पहाड़ियों पर बर्फ के रूप में जमे हुए हैं।

ऐसे में यदि हम जल संरक्षण ना करें तो यह हमारे आने वाले भविष्य मैं बहुत बड़ी संकट पैदा कर सकता है। हमें इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि हम जल का दुरुपयोग ना करें।

हमें जल संरक्षण के बारे में सोचना चाहिए। तो चलिए आपको बताते हैं कि आप जल संरक्षण किस किस प्रकार से कर सकते हैं।

जल संरक्षण के निम्नलिखित उपाय है, जिन्हें फॉलो करके आप जल संरक्षण कर सकते हैं।

  • नहाते समय सावर का उपयोग ना करके आपको बाल्टी का उपयोग करना चाहिए, जिससे कि कम पानी खर्च होगा, शावर से नहाते वक्त ज्यादा पानी खर्चा होता है।
  • बर्तन धोते वक्त ज्यादातर लोग नलको खुला छोड़ देते हैं और बर्तन को साफ करते हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए तथा उन्हें बर्तन धुलते समय तब का प्रयोग करना चाहिए।
  • शौचालय को साफ करने के लिए बहुत लोग जरा पानी खर्च करते हैं, वैसा ना करके अपने शौचालय को पोखरे, नहर आदि के जल से भी साफ कर सकते हैं।
  • सिंचाई करते समय आप ट्यूबेल का उपयोग ना करके नारों के जल से सिंचाई कर सकते हैं। गंदे पानी से सिंचाई करके आप जल संरक्षण कर सकते हैं। यदि आपके आसपास नहर या फिर कोई पोखरा नहीं है तो आप ट्यूबेल से ही अपने खेत की सिंचाई करें परंतु सीमित मात्रा में करें, ज्यादा जल व्यर्थ ना करें।

जल संरक्षण पर निबंध 500 शब्दों में

जल जीवित प्राणियों के लिए पहली आवश्यकता है, चाहे मनुष्य हो या जानवर, पक्षी हों या पेड़-पौधे। जीने के लिए भूख और प्यास दो बुनियादी और आवश्यक स्रोत हैं। भोजन के बिना कोई भी व्यक्ति तीन महीने तक जीवित रह सकता है, लेकिन पानी के बिना एक सप्ताह से अधिक जीवित नहीं रह सकता।

पृथ्वी की सतह का 71% हिस्सा पानी से ढका हुआ है और हमारे शरीर में 75% पानी है। लेकिन पृथ्वी की सतह पर का केवल 1% पानी ही पीने लायक है। थॉमस फ़ुलर कहते हैं, “जब तक कुआँ सूख नहीं जाता तब तक हमें पानी की कीमत का पता नहीं चलता।”

एक सर्वेक्षण के अनुसार, आने वाले 30 से 40 वर्षों में पीने और दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी नहीं बचेगा। पानी ही बारिश लाने के काम आता है क्योंकि सूर्य की गर्मी के कारण ही बादल बनते है जो पृथ्वी पर बारिश बनकर बरसते है।

पानी की कमी अपने साथ सूखे जैसी कई खतरनाक आपदाएँ लेकर आती है। इसलिए जल संरक्षण के विषय में हमें जागरूकता लाने की जरूरत है। पानी बचाना अब वैश्विक मुद्दा बन गया है। हमारे छोटे छोटे प्रयास जल संरक्षण के मुद्दे पर बड़े परिणाम ला सकता है।

पानी को लेकर हर एक व्यक्ति में जागरूकता जरूरी है। लोगों से पानी बचाने के लिए आग्रह करने के लिए हर देश में सरकारों को कुछ सख्त जल-बचत पहल प्रोत्साहन लागू करना चाहिए।

जल का रख-रखाव बहुत जरूरी है। लोगों को वर्षा जल संचयन, छत जल संचयन और पानी का पुन: उपयोग के बारे में माहितगार करना चाहिए।

दैनिक दिनचर्या में कपड़े धोने, नहाने और अन्य उपयोगों के लिए पानी हो सके, उतना कम उपयोग करें। पानी के मीटर लगाने से भी हम पानी का काफी बचाव कर सकते हैं।

जिन गांवों में पानी की भारी कमी है, वहां छोटे-छोटे तालाब बनाने चाहिए, ताकि बरसने वाले पानी को बचाया जा सके। लोगों को वर्षा जल का पुनर्चक्रण करने की तकनीक के बारे में सीखना चाहिए।

किसानों के लिए कोई ऐसी तकनीक या आविष्कार होना चाहिए, जिससे वे पानी बचा सकें और फसलों को बढ़ने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत न पड़े। सरकार को सीवेज व्यवस्था में सुधार करना होगा। पेड़-पौधे बादलों और बारिश को आकर्षित करते हैं, इसलिए जितना हो सके इन्हें उगाएं।

जल संरक्षण में जागरूकता लाने के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण आधार है। युवा वर्ग कार्यक्रमों के माध्यम से, नाटक के माध्यम से और नारों के माध्यम से जागरूकता ला सकते हैं।

इंटरनेट और सोशल मीडिया जागरूकता का स्रोत हो सकते हैं। अफ्रीका, राजस्थान जैसे क्षेत्रों में सूखे और भुखमरी के वीडियो और तस्वीरें पोस्ट करने से इसमें मदद मिल सकती है।

पानी एक ऐसी चीज़ है, जिसे आप पैसों से नहीं खरीद सकते। अगर हम इसी तरह पानी को बर्बाद करते रहेंगे, तोतीसरा विश्व युद्ध का कारण निःसंदेहजल ही होगा। पानी की वजह से बहुत से लोग मर रहे हैं।

हमारी सोच से ज्यादा हमारी लापरवाही और नासमझी का परिणाम बुरा होगा। जल जीवन का अमृत है। यह कोई अज्ञानता का विषय नहीं है इसके लिए हम सभी को पुनर्विचार करना होगा।

  • जल ही जीवन है पर निबंध
  • जल का महत्त्व पर निबंध
  • जल प्रदूषण पर निबंध

जल संरक्षण पर निबंध 600 शब्दों में

जल संरक्षण क्या है.

जल संरक्षण एक ऐसा उपाय है, जिसके माध्यम से आने वाले समय के लिए जल को संरक्षित किया जा सकता है। जल संरक्षण का सबसे मुख्य उपाय यह है कि हमें जल का उपयोग एक सीमित मात्रा में करना चाहिए।

आज के समय में जल का उपयोग इतनी ज्यादा मात्रा में किया जा रहा है कि ना चाहते हुए भी जल का अभाव हो रहा है। भारत में बहुत से ऐसे इलाके हैं, जहां पर पानी की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं अर्थात ऐसे क्षेत्रों में लोगों को पीने तक के लिए भी सीमित मात्रा में पानी मिल रहा है।

ऐसे में यदि जल संरक्षण किया जाए तो आने वाले समय के लिए जल को स्टोर करके रखा जा सकता है और जल संरक्षण के कारण हमारे वायुमंडल को भी बहुत से लाभ मिलते हैं।

वायुमंडलीय क्षेत्रों में जल की एक अहम भूमिका है। यदि जल समाप्त हो जाएगा या प्रदूषित हो जाएगा तो इस धरती पर असंभव हो जाएगा। इन्हीं कारणों की वजह से हर देश की सरकार अपने अपने देश में जल संरक्षण पर कई आंदोलन चला रहे हैं।

जल संरक्षण क्यों जरूरी है?

हमारे देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व भर में जल की समस्याएं काफी तेजी से बढ़ रही हैं। क्योंकि पृथ्वी पर जल्द तेजी से प्रदूषित होता जा रहा है और पीने योग्य जल का अभाव हो रहा है।

जल संरक्षण सबसे ज्यादा जरूरी इसीलिए है ताकि पीने योग्य जल और वायुमंडल को सुरक्षित रखा जा सके।

जल संरक्षण कैसे करें?

जल संरक्षण बहुत ही आसानी से किया जा सकता है, इसके लिए सभी को कुछ नियमों का पालन करना होगा। आइए जानते हैं:

जल प्रदूषण को रोके

हमें जल प्रदूषण को रोककर बड़े ही आसानी से जल का संरक्षण कर सकते हैं। आज के समय में जल प्रदूषण देश के लिए बहुत ही बड़ी विपदा बन गई है और धीरे-धीरे करके हमारे पृथ्वी का सारा जल प्रदूषित हो रहा है।

आज के समय में बहुत सी बड़ी-बड़ी ऐसी कंपनियां स्थापित हो गई है, जिनके निकलने वाले कूड़ा कचरा से नदियों तालाबों इत्यादि का जल प्रदूषित होता जा रहा है।

यदि ऐसी कंपनियों को कुछ नियमों के अंतर्गत बाधित कर दिया जाए कि वे अपने कंपनी से निकलने वाले पूरा कचरा को मिट्टी के अंदर गड्ढे में दबाएंगे तो इससे जल को संरक्षित किया जा सकता है।

आवश्यकता के अनुसार ही जल का उपयोग करें

अक्सर कई बार ऐसा लिखा जाता है कि लोगों को जल की जरूरत थोड़ी सी होगी परंतु वे आवश्यकता से अधिक जल बहाते रहते हैं। यदि जल संरक्षण करना है तो हमें पहले आवश्यकता से अधिक जल का उपयोग नहीं करना है।

इतना ही नहीं हमें इस के उपलक्ष में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक भी करना है कि वह ज्यादा जल न बहाएं। अक्सर ऐसा ग्रामीण इलाकों में और बड़े-बड़े लोगों के घरों में होता है। ग्रामीण इलाकों में लगभग सभी के घरों में हैंडपंप और ट्यूबेल होते हैं अतः लोग जल को यूं ही खुला छोड़ देते हैं।

ऐसे में जल का बहाव काफी तेजी से होने लगता है और जल आवश्यकता ना होने पर भी इधर उधर बहता ही रहता है। हमें सदैव आवश्यकता के अनुसार ही जल का उपयोग करना चाहिए।

आवश्यकता के अनुसार यदि जल का उपयोग किया जाए तो हमारा देश और पूरा विश्व जल संरक्षण के इस असीम योगदान में अपना हाथ बटा पाएगा।

जल को संरक्षित करने के उपाय सोचें

जहां कहीं भी हम जल बहाव को देखें सबसे पहले उसे रोकने का प्रयास करें और फिर ज्यादा से ज्यादा लोगों को उसके प्रति जागरूक करें और उन्हें बताएं कि कैसे हमारे विश्व में जल की कभी हो रही है और जल प्रदूषण भी फैल रहा है।

लोगों को इस विषय में जरूर बताएं कि यदि वे जल का सही उपयोग करेंगे और सीमित मात्रा में उपयोग करेंगे तो आने वाले समय में उनके ही वंशजों को लाभ होगा अन्यथा आप के ही वंशज को नुकसान पहुंचेगा। हमें खुद के साथ-साथ लोगों को भी इतना इच्छुक कर देना है, वह भी जल संरक्षण के प्रति अपने योगदान दे सके।

जल संरक्षण पर निबंध 800 शब्दों में

धरती पर जीवन जीने के लिए 3 चीज़ों का होना बेहद आवश्यक है हवा, पानी और भोजन। किसी एक का ना होना हमारे अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

इन में से जल हमारे लिए अमूल्य है। किसी ने खूब कहा है कि ‘जल है तो जीवन है’। जल एक प्राकृतिक संपत्ति है’। बिना जल के हमारे अस्तित्व के बारे में कल्पना करना भी हम नही सोच सकते।

वैसे तो पृथ्वी पर 70% भाग पानी हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 1% पानी ही हमारे लिए उपयोगी है। इसलिए जल का सही मात्रा में उपयोग करना बेहद आवश्यक है। जल संरक्षण करना भी एक कला है।

पानी का सही तरीके से इस्तेमाल करना और पानी का बचाव करना उसे जल संरक्षण कहते है। जल संरक्षण के लिए हम अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते है, जिससे हम जल को स्वच्छ और प्रदूषण विहीन संग्रह कर सके।

हमें हमारे दैनिक काम के लिए सुबह से रात तक पानी की जरुरत रहती है। इन में से ज्यादातर पानी हम बिना उपयोग किये व्यर्थ करते है। लेकिन जल संरक्षण का प्रयोग करके हम निश्चित पानी का बचाव कर सकते है।

जल संरक्षण का महत्त्व

पानी की हर एक बूँद-बूँद से हमारा अस्तित्व है। पृथ्वी के सभी छोटे, बड़े जीवों और पेड़ पौधों को जीवित रहने के लिए पानी की आवश्यकता है। बिना पानी के जीवन शक्य नहीं।

दैनिक कार्य से लेकर कॄषि तक के सभी कामों में पानी का वपराश मुख्य होता है। फसलों के उत्पादन और बिजली उत्पन्न करने की क्रिया में भी पानी मुख्य घटक है। इसलिए पानी को बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।

जल की कमी का सीधा असर कुदरत के संतुलन पर पड़ता है। बिगड़ा हुआ कुदरत का संतुलन पृथ्वी के हर जीव को संकट की ओर ले जाता है।

जल संरक्षण की आवश्यकता

जैसा कि हम जानते है कि पृथ्वी पर ज्यादातर पानी समुद्र के रूप में है और समुद्र के पानी में खारांश है। बढ़ती जनसंख्या के कारण पानी का उपयोग भी बढ़ता चला जा रहा है।

शुद्ध जल बहुत सीमित मात्रा में है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण वर्षा ऋतु का चक्र भी असमतल हो गया है। एक सर्वे के अनुसार दुनिया में भारत जल संकट से गुजरने वाला 13 वां देश है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 2 लाख लोग पीने का पानी नहीं मिलने पर कारण अपनी जान गवा रहे है। इस से हमें पता चलता है कि भावी पीढ़ी बिना जल के कारण संकट से गुजरने वाली है। इसलिए हमें वर्तमान समय में जल संरक्षण करने की आवश्यकता आन पड़ी है।

जल संरक्षण के उपाय

जल संरक्षण के लिए सबसे पहले शुरुआत खुद से करनी पड़ेगी। हमें हमारी दैनिक गतिविधियों के लिए कम से कम पानी का उपयोग करना पड़ेगा। क्योंकि हमारे द्वारा किया गया एक छोटा सा प्रयास भी बड़ा परिणाम दे सकता है।

  • हमें वर्षा के जल का संग्रह करना होगा क्योंकि वर्षा का जल शुद्ध होता है। इसके लिए हमें देश के छोटे छोटे क्षेत्रों में तालाब और जलाशय बनवाने होंगे, जहाँ वर्षा के पानी का जल संरक्षण किया जा सके।
  • साथ-साथ हमें भूगर्भ जल का भी रक्षण करना होगा क्योंकि वृक्षों की कटाई होने से भूमि प्रदूषण को भी बढ़ावा मिल रहा है और जिसके चलते भूगर्भ जल दूषित हो रहा है।
  • विज्ञान की मदद लेकर सागर के खारे पानी को मीठे पानी में शुद्धिकरण करना चाहिए। इस पानी का उपयोग घरेलु कार्य, कृषि के लिए और कारखानों में भी कर सकते हो।
  • स्नान करते समय और बर्तन साफ करते समय नल को बहता हुआ नहीं छोड़ना चाहिए।
  • फ़ैक्टरी व कारख़ानों से निकलने वाला गन्दा पानी शुद्ध पानी के जल स्रोतों से ना मिले यह ध्यान रखना बेहद जरुरी है।
  • देश में ज्यादा से ज्यादा वर्षा जल संचयन के प्रोजेक्ट शुरू करने चाहिए।
  • अगर सार्वजनिक नल और किसी भी पाईपों में से जल लीक हो रहा है तो तुरंत उनकी मरम्मत करवानी चाहिए।
  • पानी के फालतु उपयोग पर रोक लगाने के लिए सभी छोटे और बड़े घरो में पानी के मीटर लगवाने चाहिए और पानी का व्यर्थ उपयोग करने वालों के लिए दंडात्मक अपराध बनाने चाहिए।
  • बच्चों और महिलाओं जल संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए छोटे छोटे अभियान चलाने चाहिए।
  • खेतो में सिंचाई के लिए टपक सिंचाई (ड्रिप इरीगेशन) पद्धति का उपयोग करना चाहिए।
  • पेड़ों का सीधा नाता पानी से है क्योंकि पेड़ों के कारण ही वर्षा होती है। इसलिए हो सके तो ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए।
  • यदि मुमकिन हो तो वर्षा जल संरक्षण के लिए घर के छत पर एक या दो टंकी बनवानी चाहिए। इस पानी का उपयोग दैनिक कार्यों में करना चाहिए।

जल हमारे जीवन का एक आधार स्तंभ है। अगर हमें अपना भविष्य सुनहरा बनाना है तो जल संरक्षण अपनाना पड़ेगा और लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ानी पड़ेगी। क्योंकि ‘जल है तो कल है’।

जल संरक्षण पर निबंध pdf

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Rahul Singh Tanwar

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वर्षा जल संचयन पर निबंध (Rain Water Harvesting Essay in Hindi)

वर्षा जल संचयन

वर्षा जल संचयन एक तकनीक है जिसका उपयोग भविष्य में इस्तेमाल करने के उद्देश्य (जैसे कृषि आदि) के लिये अलग-अलग संसाधनों के विभिन्न माध्यमों के इस्तेमाल के द्वारा बारिश के पानी को बचाकर रखने और इकट्ठा करने की एक प्रक्रिया है। बारिश के पानी को प्राकृतिक जलाशय या कृत्रिम टैंको में एकत्रित किया जा सकता है। सतह के लबालब भर जाने के द्वारा खत्म होने से पहले अधस्तल जलदायी चट्टानी पर्त में से सतह के जल का अंत:स्पदंन इकट्ठा करने का दूसरा तरीका है।

वर्षा जल संचयन पर छोटे तथा बड़े निबंध (Short and Long Essay on Rain Water Harvesting in Hindi, Varsha Jal Sanchayan par Nibandh Hindi mein)

निबंध 1 (300 शब्द) – वर्षा जल संचयन के तरीके व फायदे.

धरती पर बारिश की हर बूंद लोगों के लिये भगवान के आर्शीवाद के समान है। ताजे बारिश का पानी जमीन पर मोती के समान गिरता है, इसलिये विकासशील क्षेत्रों और प्राकृतिक जल संसाधनों की कमी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में खासतौर से बारिश के पानी के महत्व को हर एक को समझना चाहिये। छतों पर और सड़कों के किनारे बह रहे वर्षा के जल को बिना बर्बाद किये इकट्ठा करने की कोशिश करनी चाहिये।

वर्षा जल संचयन के तरीके व फायदे

सभी क्षेत्रों में जल आपूर्ति को आसान बनाने के लिये नयी और असरदार तकनीकों को इस्तेमाल करते हुए हमें अपनी जल इकट्ठा करने की पुरानी परंपरा को लाना चाहिये। क्योंकि केवल हैंड पम्प, कुएँ तथा भौम जलस्तर के दूसरे संसाधन लाखों लोगों की पाने योग्य पानी की जरुरत को पूरा नहीं कर सकते हैं।

जल की कमी वाले क्षेत्रों में पानी उपलब्ध कराने के लिये बहुत सालों से सबसे चिरस्थायी और असरदार तरीका बारिश के पानी को एकत्रित करना है। बहुत सारे फायदों के साथ बारिश के पानी को इकट्ठा करना बहुत ही सस्ता तरीका है। ये बहुत सारे उद्देश्यों के लिये मददगार है जैसे घरेलू कार्यों, मैदानी सिंचाई, पशुधन, कृषि और पशु-पालन आदि।

छत के पानी का संचयन बारिश के पानी को इकट्ठा करने का एक तरीका है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिये ये विधियाँ बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। नियमित जल की आपूर्ति की कमी में भी वो बारिश के पानी से मौसमी फसल की खेती को जारी रख सकते हैं। जब कभी भी बारिश हो, बारिश के पानी को मानव निर्मित तालाब या टैंक में जमा किया जा सकता है। खाई, कुएँ खोद कर, विभिन्न आकार आदि के तरीकों से बारिश के पानी को इकट्ठा करने के द्वारा भूमि जलस्तर को पुन: भरा जा सकता है। वर्षा जल संचयन के दूसरे तरीके जैसे पानी की टंकी, तालाब आदि कम से कम 4 से 6 महीने के लिये भूमि जलस्तर के उपयोग को घटाने में मदद करता है। बड़े और स्वच्छ जल के आकारों को बनाने के द्वारा बरसात मौसम में अधिक स्वच्छ बारिश के पानी को इकट्ठा किया जा सकता है।

वर्षा जल संचयन प्रयत्क्ष और अप्रयत्क्ष दोनों तरीकों से भूमि के जलस्तर को फिर से बनाने में मदद करता है। ये भारत और दूसरे देशों के पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में बहुत असरकारी होता है।

निबंध 2 (400 शब्द) – बारिश के पानी को इकट्ठा करने के लाभ

आज के दिनों में, लोग पानी की अपनी सभी जरुरतों के लिये जल आपूर्ति की सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। सरकार के द्वारा जल प्रबंधन और वितरण का वर्तमान परिदृश्य शहरों में केन्द्रीकृत हो गया है जो जल प्रबंधन में सामुदायिक जिम्मेदारी के एक बड़े अंतर को ले आयी है। ये धीरे किन्तु नियमित तौर पर जल इकट्ठा करने की पुरानी पद्धति को समाप्त कर रही है।

बारिश के पानी को इकट्ठा करने के लाभ

भविष्य में विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिये वर्षा ऋतु के दौरान बारिश के पानी को इकट्ठा करने की एक पुरानी लेकिन प्रभावकारी तकनीक वर्षा जल संचयन हैं। पानी की कमी की समस्या से उभरने के लिये भारत के विभिन्न जगहों में इसे बारंबार इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक तरीके से भूमि जलस्तर को पुन: चार्ज करने का अच्छा साधन है बारिश के पानी का संचयन।

हालांकि, जमीन से बारिश का जल का अन्त:स्रवण में कमी के साथ ही बड़े स्तर पर तेजी से फैलता शहरीकरण और शहरों के विकास के कारण दिनों-दिन भूमि जलस्तर घट रहा है। बारिश के पानी का संचयन भूमिगत जल के इस्तेमाल को घटाने के साथ ही भविष्य में हमेशा के लिये इसके स्तर को बनाए रखने का तरीका है। विभिन्न उद्देश्यों के लिये जल की मांग की आपूर्ति करने के लिये ये भारत और दूसरे देशों के सूखाग्रस्त इलाकों के लिये बहुत महत्वपूर्ण है। निम्न बिन्दुओं से ये स्पष्ट हो जायेगा कि क्यों बारिश के पानी को संग्रहित करें:

  • ये भूमि जलस्तर को गिरने से बचाने में बड़ी भूमिका निभाता है और उसे सुधारने में मदद करता है।
  • जलवाही स्तर में जल की गुणवत्ता को सुधारने में ये मदद करता है।
  • ये मानसून के दौरान सतह के जल को बहने से बचाता है और अधिक जल को संरक्षित करने के लिये है।
  • ये मिट्टी के कटाव में कमी लाने में मदद करता है।
  • ये लोगों के बीच में जल संरक्षण की पुरानी परंपरा को लाने के लिये है।

निम्न तरीकों का इस्तेमाल कर बेहतर तरीके से बारिश का पानी को इकट्ठा किया जा सकता है जैसे सतह और छतों के पानी बहने या बर्बादी से बचा कर रखना। दोनों ही तरीकों से भूमि जलस्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है साथ ही विभिन्न जरुरतों को पूरा करने के लिये जल आपूर्ति की एक सस्ती और आसान तकनीक है।

  • नगरपालिका के जल आपूर्ति भार और बिजली बिल को घटाने में, मुफ्त जल आपूर्ति को सुधारने में, ग्रामीण क्षेत्रों में फसल उत्पादन में ये मदद करता है, जो खाद्य सुरक्षा की ओर ले जाता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू या व्यक्तिगत असुरक्षा को घटाने में वर्षा जल संचयन व्यवस्था मदद करती है।
  • ये कम पानी वाले क्षेत्रों में आसान और कम कीमत की जल आपूर्ति उपलब्ध कराता है जो खाद्य सुरक्षा और आय उत्पन्न करने में मदद करता है।

तमिलनाडु भारत का एकमात्र राज्य है और अब पहला भारतीय राज्य होगा जहाँ बारिश के पानी को इकट्ठा करना जरुरी होगा। तमिलनाडु राज्य सरकार ने 30 मई 2014 को ये घोषणा कि है कि चेन्नई में विभिन्न स्थानों पर बारिश के जल को इकट्ठा करने के लिये लगभग 50,000 ढांचों की स्थापना करनी है। अब तक, तमिलनाडु में लगभग 4000 मंदिरों में वर्षा जल संग्रहण के लिये टैंक हैं जो जमीन के पानी को पुनर्भरण में भी मदद कर रहें हैं।

निबंध 3 (500 शब्द) – वर्षा जल संचयन क्यों आवश्यक है

भविष्य में पानी की कमी को पूरा करने और जल को बहने से बचाने के लिये प्राकृतिक संसाधनों और कृत्रिम डिजाइन संसाधनों के माध्यम से बारिश के पानी को इकट्ठा और संग्रहित करना वर्षा जल संचयन है। कई सारे कारणों के द्वारा जल संचयन की मात्रा प्रभावित होती है जैसे बारिश की प्रायिकता, बारिश की मात्रा, बारिश के पानी को इकट्ठा करने का तरीका और पानी को इकट्ठा करने के लिये संसाधनों का आकार। कई सारी वजहों जैसे वनों की कटाई और पारिस्थितिकी असंतुलन से भूमि जलस्तर घटता जा रहा है।

Essay on Rain Water Harvesting in Hindi

बारिश के पानी का संचयन क्यों आवश्यक है:

खासतौर से शहरी क्षेत्रों में लगातार बढ़ते शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण जल आपूर्ति की मांग बढ़ रही है। इसका कारण अत्यधिक भूमिगत जल का इस्तेमाल है जिससे ये नीचे की ओर जा रहा है। है अगर तुरंत कुछ प्रभावशाली कदम नहीं उठाये गये तो भविष्य में पानी के कमी का खतरा बड़े पैमाने पर बढ़ेगा और ये जीवन के लिये भी खतरा साबित हो सकता हैं।

जल संचयन बहुत ही मददगार है विभिन्न जरुरतों को पूरा करता है जैसे भूमि जलस्तर का पुनर्भरण, जल आपूर्ति में खर्च होने वाली बिजली के बिल को घटाएगा और किसी भी समय सरल जल आपूर्ति उपलब्ध करायेगा जब भी इसकी जरुरत होगी। ये आकलन किया गया है कि जलस्तर में 1 मीटर की बढ़ौतरी लगभग 0.4KWH बिजली को बचायेगा। बारिश के पानी का संग्रहण सभी क्षेत्रों के लोगों के लिये बहुत जरुरी है। भविष्य में जल की कमी का डर खत्म करना बहुत अच्छा है। निम्न बिन्दु ये समझने में मदद करेंगे कि क्यों वर्षा जल संग्रहण की आवश्यकता है:

  • विभिन्न उद्देश्यों के लिये पानी की मांग को सतह का जल पूरा नहीं कर सकता है।
  • अपनी सभी जरुरतों के लिये भूमि जल पर सभी निर्भर हैं।
  • वनों की कटाई, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, नीचे की मिट्टी से बारिश का पानी रिसना आदि के कारण लगातार भूमि जलस्तर घट रहा है।
  • प्राकृतिक जल संसाधनों में जल के स्तर को बारिश के पानी का संग्रहण बनाये रखता है।
  • ये सड़कों पर बाढ़ का खतरा और मिट्टी के घिसावट के खतरे को कम करता है साथ ही जल की गुणवत्ता को सुधारता है।

बारिश के पानी के संग्रहण की मुख्य तकनीक

बारिश के पानी के संग्रहण की मुख्य तकनीक निम्न है:

  • भविष्य में उपयोग के लिये सतह के जल को इकट्ठा करना।
  • भूमि जल का पुनर्भरण करना।

बारिश के पानी का संचय से लाभ

व्यक्तिगत या शहर के स्तर पर बारिश के पानी का संचय से निम्न लाभ इस प्रकार हैं:

  • ये पानी की आपूर्ति बिल खासतौर से संस्थानों के बिलों में कमी लाता है ।
  • फ्लोराईड, नाइट्रेट्स और इसकी लवणता को कम करने के द्वारा जमीन के पानी की गुणवत्ता को सकारात्मक रुप से प्रभावित करके बारिश का पानी जमीन में दुबारा चार्ज हो जाता है।
  • इसके पास लगभग निष्पक्ष pH और शून्य कठोरता होती है जो इसे घरों, उद्योगों, संस्थानों और दूसरे वाणिज्यिक अधिष्ठानों में अधिक इस्तेमाल करने के लायक बनाता है।
  • ये सार्वजनिक जल आपूर्ति स्रोतों की चिंता को कम कर सकता है।
  • जमीन से बारिश के पानी के पुनर्भरण से तटीय क्षेत्रों में ताजे पानी के स्रोतों में सागरीय जल निमज्जन से बचाता है।
  • शहरी बाढ़ नियंत्रण में ये मदद करता है अगर लोग छतों से बारिश के पानी को इकट्ठा करते हैं।
  • ये नगरपालिका से लोगों की जल की मांग को घटाएगा जिससे पूरे शहर में जल वितरण में भी कम ऊर्जा खर्च होगी।

सतह से बारिश के पानी को इकट्ठा करना बहुत ही असरदार और पारंपरिक तकनीक है। इसे छोटे तालाबों, भूमिगत टैंकों, डैम, बांध आदि के इस्तेमाल से किया जा सकता है। हालांकि, भूमिजल का पुनर्भरण तकनीक संग्रहण का एक नया तरीका है। इसे कुआँ खोद कर, गड्ढा, खाई, हैंड पम्प, कुओं को पुन: चार्ज करके किया जा सकता है।

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